लखनऊ के ऐतिहासिक रूमी दरवाजे के आसपास इन दिनों अवैध पार्किंग की समस्या बढ़ गई है, जिससे वहां आने वाले पर्यटक काफी परेशान हैं। रूमी दरवाजे के रेनोवेशन का कार्य जो कि दिसंबर 2022 से शुरू हुआ था, अभी तक अधूरा है। इस काम में सरकारी खजाने से लगभग 1.5 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन यह परियोजना अब भी अपनी पूर्णता से दूर है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की लखनऊ शाखा इसे मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट के समान विकसित करने की दिशा में प्रयासरत है। इस दरवाजे के सामने बैठने के लिए बेंच बनाई जाएंगी, जहां पर्यटक खूबसूरत सेल्फी ले सकेंगे, लेकिन पार्किंग की समस्या के चलते ये योजनाएं सफल नहीं हो पा रही हैं।
दरवाजे के संरक्षण के लिए प्रशासन ने हाल ही में वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के प्रयास किए हैं। भारी वाहनों को उस क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए डिवाइडर का निर्माण किया गया है। नई व्यवस्था से दोनों तरफ से आने वाले वाहनों की आवाजाही को रोकने की योजना बनाई गई है। पार्किंग संचालक ने पार्किंग की पुष्टि के लिए ठेकों के कुछ दस्तावेज भी पेश किए हैं, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें हुसैनाबाद ट्रस्ट से 50,000 रुपए प्रति माह का ठेका मिला है। हालांकि, इस रसीद में ट्रस्ट का कोई उल्लेख नहीं है, केवल रूमी दरवाजे के पार्किंग का जिक्र है।
इस संबंध में हुसैनाबाद ट्रस्ट के सुपरिटेंडेंट अहमद मेंहदी ने कहा है कि उन्हें रूमी गेट पर अवैध पार्किंग की जानकारी नहीं है, लेकिन वे इसकी जांच करने का आश्वासन देते हैं। वर्तमान में ट्रस्ट का संरक्षण जिलाधिकारी की देखरेख में चल रहा है, और एडीएम पूर्वी अमीत कुमार इसकी निगरानी कर रहे हैं। यह अवैध पार्किंग न केवल पर्यटकों की समस्याओं का कारण बन रही है, बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की शाखा के लिए भी चुनौती उत्पन्न कर रही है।
लखनऊ के नवाब मसूद अब्दुल्लाह ने पार्किंग की इस समस्या के समाधान के लिए सुझाव दिया है कि रूमी गेट के निकट एक नो व्हीकल जोन होना चाहिए। उनका मानना है कि पारकिंग की वजह से दरवाजे की सुंदरता खत्म हो रही है। इतिहासनुसार, रूमी दरवाजे का निर्माण नवाब आसफउद्दौला द्वारा 1784 में किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को रोजगार प्रदान करना था। यह दरवाजा न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि लखनऊ की वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण भी है।
डॉ. रवि भट्ट के अनुसार, रूमी दरवाजा लखनऊ की पहचान है और इसकी निर्माण प्रथा ने इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल बना दिया है। इसकी खूबसूरत नक्काशी और डिज़ाइन इसे ऐतिहासिक स्थलों में से एक विशेष स्थान प्रदान करती है। आज भी जब पर्यटक यहां आते हैं, तो उन्हें अवैध पार्किंग के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जो इस धरोहर की सुंदरता को प्रभावित कर रहा है। अत: प्रशासन को इस समस्या को निपटाने के लिए तत्परता से कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि रूमी दरवाजा अपने पुराने आकर्षण को फिर से प्राप्त कर सके।