इस प्रेरणादायक कहानी का केंद्र एक किसान माधु रेबारी हैं, जो डूंगरपुर जिले के घटाऊ गांव के निवासी हैं। 62 वर्षीय माधु ने अपनी जीवनभर की कमाई, जो लगभग 18 लाख रुपए है, गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय को दान कर दी है। उनका उद्देश्य गांव के बच्चों की शिक्षा को सशक्त बनाना है। कच्चे घर में रहने के बावजूद, माधु ने अपने लिए किसी भी प्रकार की भौतिक सुविधा नहीं चुनी और अपने परिवार के रूप में बच्चों को अपने स्कूल में शामिल कर लिया। पत्नी के निधन के बाद से उन्होंने अपना जीवन स्कूल और बच्चों की शिक्षा को समर्पित कर दिया है।
पिछले आठ सालों से माधु हर हफ्ते स्कूल में जाकर बच्चों के साथ समय बिताते हैं। वे बच्चों को स्थानीय वागड़ी भाषा में कहानियां सुनाते हैं और गणित एवं पढ़ाई के अन्य विषयों में उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। माधु ने स्कूल के प्रार्थना हॉल के निर्माण पर 5 लाख रुपए खर्च किए, जिससे बच्चों को एक उचित स्थान पर प्रार्थना करने की सुविधा मिली। इस हॉल का नाम “माधुर्य भवन” रखा गया है, जो माधु की निस्वार्थता का प्रतीक है। इसके साथ ही, उन्होंने ज्ञान पोर्टल के लिए भी 3 लाख रुपए का योगदान दिया है, जो शिक्षा के डिजिटल माध्यम को प्रेरित करने में मदद करेगा।
माधु का दान केवल उनके द्वारा नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुका है। गांव में अब दान देने की परंपरा तेजी से विकसित हो रही है। उनके पड़ोसी लक्ष्मण रेबारी ने स्कूल के जल मंदिर के निर्माण के लिए 2 लाख रुपए का योगदान दिया है, जबकि डूंगरजी रेबारी ने किचन गार्डन के लिए भूमि दान की है। यह उदाहरण दर्शाता है कि गांव के लोग अब शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से ले रहे हैं।
1975 में स्थापित इस विद्यालय में वर्तमान में 82 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय के प्रधान महेश व्यास की मानें तो, जब भी उन्होंने माधु या गांव के किसी अन्य व्यक्ति से स्कूल के लिए मदद मांगी, उन्होंने कभी भी मना नहीं किया। यह एक सामुदायिक भावना का उदाहरण है, जहां सभी लोग मिलकर बच्चों के भविष्य को संवारने का प्रयास कर रहे हैं। माधु का यह दान और उनके द्वारा की गई प्रेरणाएं न केवल स्कूल की जरूरतों को पूरा कर रही हैं बल्कि पूरे गांव में शिक्षा को एक नई दिशा दे रही हैं।
इस प्रकार, माधु रेबारी की कहानी हमारे समाज में निस्वार्थता और मानवता के मूल्य की महत्वपूर्ण मिसाल है, जो यह दिखाती है कि जब हम अपने आसपास के लोगों की भलाई के लिए प्रयासरत रहते हैं, तो हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा सबसे बड़ा धन है, जिसे हम किसी भी स्थिति में साझा कर सकते हैं।