सरफेस वाटर प्रोजेक्ट की मिट्टी पर अकाली दल ने विजिलेंस को दी धमाकेदार शिकायत!

**जालंधर: डीएवी विश्वविद्यालय की एनएसएस इकाई द्वारा युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन**

जालंधर में डीएवी विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए 18 से 25 वर्ष आयुवर्ग के सभी छात्र शामिल हो सकते हैं। छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 9 मार्च निर्धारित की गई है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. स्मृति खोसला ने बताया कि जालंधर और लुधियाना जिलों से जुड़े छात्र और युवा इस अवसर का लाभ उठाकर अपने विचार साझा कर सकते हैं।

प्रतिभागियों को विकसित भारत के विषय पर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत करते हुए एक वीडियो अपलोड करना होगा। इस कार्यक्रम में चयनित छात्रों को विधानसभा और भारत सरकार के मंच पर अपने विचार जाहिर करने का अनूठा मौका मिलेगा। इसके साथ ही, उन्हें पुरस्कार भी दिया जाएगा। डीएवी विश्वविद्यालय के कुलपति, डॉ. मनोज कुमार ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों के नवोन्मेषी विचार देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

**सरफेस वाटर प्रोजेक्ट में घोटाले का आरोप**

इस बीच, जालंधर में सरफेस वाटर प्रोजेक्ट के ट्रीटमेंट प्लांट की खुदाई में निकली मिट्टी की टेंडरिंग में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए शिरोमणि अकाली दल के कपूरथला प्रभारी एचएस वालिया ने एक प्रेस रिलीज जारी की है। उन्होंने कहा कि सीवरेज बोर्ड के अधिकारियों द्वारा मिट्टी की बिक्री के लिए रखी गई आरक्षित कीमत 2 करोड़ 31 लाख रुपए थी, लेकिन अधिकारियों ने सही तरीके से टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

वालिया ने आगे कहा कि उनकी कंपनी ने भी इस टेंडर में भाग लिया, लेकिन उन्हें मिट्टी की कीमत की नीलामी के लिए लॉगिन नहीं दिया गया। शाम के समय ऑनलाइन सिस्टम नियमों के अनुसार बंद कर दिया गया, जिसके चलते उनकी कंपनी को उचित अवसर नहीं मिला। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों को ई-मेल किया है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।

वालिया ने सरकार को 70 लाख रुपए अतिरिक्त रेवेन्यू देने की पेशकश की है, जिससे प्रशासक जालंधर के विकास में इस राशि का उपयोग कर सकें। साथ ही, उन्होंने पूरे मामले की शिकायत विजिलेंस विभाग में करने की बात कही है, ताकि सही कार्रवाई की जा सके। इस प्रकार, यह मुद्दा जालंधर के विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।

**निष्कर्ष**

जालंधर में युवा संसद कार्यक्रम छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा अवसर प्रदान करता है, जबकि सरफेस वाटर प्रोजेक्ट से संबंधित मिट्टी की टेंडरिंग में आरोपित गड़बड़ियाँ विकास और प्रशासन की चुनौतियों का संकेत देती हैं। इन दोनों घटनाओं में जालंधर के युवाओं और नागरिकों की सक्रिय भूमिका के प्रति जागरूकता लाने की आवश्यकता है। साथ ही, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की भी जरुरत है।