पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा के बाद, आज छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और हाल ही में पंजाब के प्रभारी नियुक्त किए गए भूपेश बघेल दिल्ली में विधायकों की बैठक कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण मीटिंग में 21 मार्च से शुरू हो रहे पंजाब के बजट सत्र को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। बैठक के दौरान, 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस कैसे तैयारी करेगी, इस संबंध में भी महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए जाएंगे। इस बैठक में कांग्रेस के राज्याध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता प्रताप सिंह बाजवा भी उपस्थित रहेंगे। इस बीच, अधिकांश विधायक पहले ही दिल्ली पहुँच चुके हैं।
पंजाब में कांग्रेस के पास इस समय 16 विधायक हैं, जिसमें से दो विधायकों, विक्रम चौधरी और संदीप जाखड़ को निलंबित किया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में बुलाए गए नेताओं को अपने सुझाव लेकर आने के लिए कहा गया है। इससे पहले भूपेश बघेल सभी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी तेजी से संगठनात्मक प्रक्रिया को सुदृढ़ करना चाहती है।
कांग्रेस की इस रणनीति पर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) भी प्रश्न उठा रही है। हाल ही में भूपेश बघेल ने दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ पांच घंटे लंबी बैठक आयोजित की थी, जिसके बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि पार्टी पंजाब में मजबूत स्थिति में है, लेकिन उसे माइक्रो मैनेजमेंट की आवश्यकता है। इस बैठक के परिणामस्वरूप, अगली मीटिंग में पंजाब के मुद्दों पर विशेष एजेंडा तैयार किया जाएगा और सरकार के खिलाफ प्रभावी रणनीति विकसित की जाएगी।
भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि पार्टी अब बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की योजना बना रही है। बूथ स्तर पर समितियाँ बनाए जाने का प्रस्ताव है, ताकि किसानों, युवाओं, महिलाओं और दलितों के मुद्दों की उठाने में मदद मिल सके। यही नहीं, पार्टी इस बार जनता के बीच जाकर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए रणनीतियाँ तैयार करने के पक्ष में है। पंजाब सरकार के बजट सत्र, जो 21 से 28 मार्च तक चलेगा, के संबंध में भूपेश ने कहा कि यह अवधि कम है और इसको लेकर वे सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे।
इस प्रकार, कांग्रेस पार्टी अपनी ताकत को स्थापित करने और आगामी चुनावों को लेकर ठोस योजना बनाने के लिए तैयार है। भूपेश बघेल की अगुवाई में चल रही यह बैठक कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, खासकर जब राज्य में विपक्ष की स्थिति को मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इन सभी घटनाक्रमों के बीच, कोई शक नहीं कि पंजाब की राजनीति में अगले दिनों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।