फवाद खान और वाणी कपूर की फिल्म ‘अबीर गुलाल’ के टीजर रिलीज होने के बाद से ही इसे लेकर भारत में विरोध की आवाजें उठ रहीं हैं। लेकिन इस बीच, फिल्म को बॉलीवुड इंडस्ट्री से समर्थन मिलने लगा है। मशहूर एक्ट्रेस अमीषा पटेल ने इस संदर्भ में अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान के तहत कला में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने IANS से बातचीत में बताया कि वे फवाद खान की कला की हमेशा सराहना करती रही हैं और सभी कलाकारों का स्वागत करना चाहिए। अमीषा ने बताया, “यह भारत की संस्कृति है, कला को हमेशा सराहना की जानी चाहिए, मैं इसमें किसी प्रकार के भेदभाव का समर्थन नहीं करती।”
इसके साथ ही, ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ फिल्म में नज़र आ चुके अभिनेता इमरान जाहिद ने भी इस फिल्म के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि फवाद खान और वाणी कपूर की फिल्म ‘अबीर गुलाल’ को भारत में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। आज के डिजिटल युग में, जहां सांस्कृतिक आदान-प्रदान की संभावनाएं बढ़ीं हैं, वहां केवल सिनेमाघरों में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाना उचित नहीं है। इमरान ने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि देशभक्ति को किसी गैर-वैधानिक संगठन के निर्देशों के साथ जोड़ना गलत है।
इमरान ने यह भी उल्लेख किया कि जब उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से जानकारी मांगी, तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बजाय, उन्हें सिर्फ ऑफिस की कार्रवाई में उलझा दिया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी मंत्रालय ने यह जानकारी नहीं दी कि क्या पाकिस्तानी कलाकारों को भारतीय फिल्मों में काम करने की औपचारिक अनुमति हासिल है।
फवाद खान की इस फिल्म ‘अबीर गुलाल’ के बारे में जानकर उनके प्रशfans में उत्साह का माहौल है। वो बॉलीवुड में आठ साल बाद अपनी वापसी कर रहे हैं। टीजर लॉन्च होने के बाद, जैसे ही फिल्म की रिलीज की तारीख सामने आई, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने इसका विरोध शुरू कर दिया और इसे महाराष्ट्र में रिलीज न करने की धमकी दी है। इस स्थिति में, बॉलीवुड के कई कलाकार और निर्माता फवाद और वाणी के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है कि भारतीय सिनेमा एक समावेशी और विविधता से भरा स्थान हो सकता है।
कुल मिलाकर, ‘अबीर गुलाल’ की रिलीज पर हो रहे विरोध ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आज की कला और संस्कृति किसी भी प्रकार के भेदभाव से ऊपर है और सभी कलाकारों का सम्मान होना चाहिए।