राजस्थान में पालतू गाय और भैंस रखने वाले परिवारों के लिए राज्य सरकार ने ‘गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना’ लागू की है। इस योजना के तहत परिवारों को एक लाख रुपये का बिना ब्याज वाला लोन दिया जा रहा है। इसे सहकारिता विभाग द्वारा बिना किसी जटिलता के प्राप्त किया जा सकता है। खास बात यह है कि अगर आवेदक का सिबिल स्कोर 600 या इससे कम है, तब भी उसका आवेदन अस्वीकृत नहीं होगा। इस योजना के माध्य्म से 31 मार्च 2025 तक 33,475 परिवारों को लोन वितरित किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि 2024-25 में ऐसे 5 लाख परिवारों को अधिकतम लोन दिया जाए, और वर्तमान में 1 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। अगले वित्तीय वर्ष 2025-2026 में अतिरिक्त 2.5 लाख नए परिवारों को लोन देने की योजना है।
हालांकि, गोपालकों के बीच कम आवेदन प्राप्त होने का कारण योजना की जानकारी का अभाव है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि गोपाल क्रेडिट कार्ड लोन कैसे मिलेगा और इसके लिए क्या शर्तें होंगी। पहले की कई कठिन शर्तें जैसे सिबिल स्कोर का मानक और डेयरी समिति की सदस्यता अब हटा दी गई हैं। अब आवेदकों को केवल जनाधार कार्ड और आधार कार्ड की आवश्यकता है, और अगर उन्होंने पहले कभी दो से अधिक लोन लिए हैं, तो भी उनके लिए आवेदन का रास्ता खुला है। इस योजना के अंतर्गत गोपालक गाय और भैंस के लिए आवश्यक सामग्री जैसे शेड और ताजा चारा खरीदने के लिए लोन का उपयोग कर सकते हैं।
इस योजना के तहत लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज नहीं लिया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। आवेदक को राजस्थान सहकारिता विभाग की वेबसाइट पर जाकर आवश्यक विवरण भरकर आवेदन करना होगा। इसके बाद आवेदन अपने आप ही संबंधित सहकारी बैंक को भेजा जाएगा। बैंक द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद लोन स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाएगा। यदि कोई समस्या आती है, तो आवेदक को हर कदम की जानकारी उनके मोबाइल नंबर पर एसएमएस द्वारा दी जाएगी, और पोर्टल पर भी स्थिति चेक की जा सकेगी।
एक बार लोन स्वीकृत होने के बाद, राशि आवेदक के संबंधित सहकारी बैंक के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। गोपालक अपनी सुविधा अनुसार एक वर्ष में इसे एकमुश्त या 12 किश्तों में चुका सकते हैं। लोन का लाभ उठाने के लिए उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर चुकता करना होगा। योजना में प्रत्येक जिले के लिए गोपालकों का अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो कि हर परिवार को पूर्व निर्धारित समय में लाभ मिले।
इस योजना से न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि यह स्थानीय डेयरी उत्पादन को भी बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा। राज्य सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पशुपालकों को नया आत्मविश्वास प्राप्त होगा।