जीएनडीयू में बाहरी लोगों की एंट्री पर जबरदस्त हंगामा!

**भास्कर न्यूज** | अमृतसर में यूनाइटेड सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन ने बुधवार सुबह 11 बजे गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर कार्यालय के बाहर धरना देकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाई। इस दौरान छात्र संगठन ने प्रबंधन के विरुद्ध नारेबाजी की और सुरक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई जुगराज सिंह मझैल ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में विश्वविद्यालय में कई बार बाहरी लोगों ने विद्यार्थियों के साथ हिंसक घटनाएं घटित की हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान एक बार तो एक बाहरी युवक के पास से पिस्तौल भी बरामद हुई थी।

भाई मझैल ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय की प्रबंधन द्वारा बाहरी व्यक्तियों को अपनी गाड़ी उपलब्ध कराने का काम हो रहा है, जो कि बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा गार्ड इन बाहरी लोगों को रोकने में असफल हैं, जिससे छात्रों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो रहा है। छात्रों के बीच दहशत का माहौल बना हुआ है, और हाल ही में एक युवक ने छात्रों को जान से मारने की धमकी भी दी है। इस संदर्भ में फेडरेशन ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से कानूनी जांच की मांग की थी, लेकिन उनके इस अनुरोध पर कोई सुनवाई नहीं की गई है, जिसके चलते छात्रों में निराशा फैल गई है।

धरने के दौरान, एसीपी वेस्ट शिवदर्शन और थाना कंटोनमेंट एसएचओ अमनदीप कौर भी विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद रहे, ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके। यूनीवर्सिटी परिसर में छात्रों के बीच खौफ और असुरक्षा की भावना व्याप्त है, जो कि शिक्षण संस्थान की प्रतिष्ठा के लिए हानिकारक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्र संगठन ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा की पुनरावृत्ति न हो।

इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है। इससे पहले भी छात्र संगठनों ने अपनी सुरक्षा को लेकर कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से ठोस कदम उठाने में नाकामी छात्रों को चिंता में डाल रही है। छात्र संगठन ने एकजुट होकर अपने हक के लिए आवाज उठाने का निर्णय लिया है, ताकि आगे इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके और छात्रों को एक सुरक्षित माहौल मिल सके।

इस धरने का उद्देश्य केवल अपनी आवाज उठाना नहीं है, बल्कि छात्र समुदाय के भीतर एकजुटता प्रदर्शित करना भी है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है, तो वे भविष्य में और भी बड़े आंदोलनों की योजना बना सकते हैं। अब यह देखना बाकी है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे को लेकर क्या कदम उठाता है और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कितनी तत्परता दिखाता है।