राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के लिए संचालित मुफ्त इलाज योजना, जिसे आरजीएचएस (राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना) कहा जाता है, में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस मामले में असाधारण रूप से करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर हुआ है, जिसमें चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों ने मिलकर फर्जी बिल तैयार किए हैं। ये बिल उन दवाओं के हैं, जो वास्तव में बेची ही नहीं गईं। अब तक इस मामले में 54 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों का पर्दाफाश किया जा चुका है, और सूत्रों के अनुसार यह आंकड़ा 200 करोड़ से अधिक जा सकता है।
वित्त विभाग को तब इस घोटाले की जानकारी मिली जब उन्होंने देखा कि जनवरी से मार्च के बीच अचानक क्लेम की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हुए ऑडिट ने इस फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुंचने में मदद की। डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर संचालकों ने मिलकर सरकारी कर्मचारियों के ओपीडी कार्ड का गलत इस्तेमाल करते हुए, महंगी दवाइयों के नाम पर बिल तैयार किए और उन्हें वित्त विभाग में जमा कर दिया।
दूसरी ओर, एक मामले में जयपुर के एक सरकारी डॉक्टर ने अपने निजी क्लिनिक से ओपीडी की 500 से अधिक पर्चियां तैयार कीं, और उन्हें दो फार्मेसियों – अर्पिता मेडिकल और लक्ष्मी मेडिकल – की मदद से करोड़ों रुपये के फर्जी बिल बनाने के लिए इस्तेमाल किया। जब ऑडिट टीम ने इन पर्चियों की जांच की, तो पाया गया कि इनमें से कई पर बिना किसी तरह की मेडिकल हिस्ट्री या रोग का विवरण लिखा गया था। इससे स्पष्ट होता है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई थी।
एक विशेष केस स्टडी से पता चला है कि एक ही डॉक्टर की पर्चियों का उपयोग करते हुए जयपुर की दो फार्मेसियों ने करोड़ों रुपये का क्लेम पास करवाने का प्रयास किया। डॉक्टर मनोज कुमार जैन, जो एसएमएस अस्पताल में जनरल फिजीशियन हैं, का नाम इस घोटाले में सामने आया है। उनकी ओपीडी पर्ची को निजी क्लिनिक के नाम से काटकर, उस पर अस्पताल की सटीक जानकारी चिपका दी गई थी, जिससे यह फर्जीवाड़ा संभव हो सका।
फिलहाल, वित्त विभाग ने दोनों मेडिकल स्टोर्स के आरजीएचएस लाइसेंस को रद्द कर दिया है और डॉक्टर मनोज जैन के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है। इस मामले से संबंधित गड़बड़ियों की संख्या बढ़ने के कारण वित्त विभाग ने क्लेम रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रमुख सचिव नवीन जैन ने बताया कि हर दिन 25,000 से अधिक क्लेम आरजीएचएस के तहत आते हैं और इस मामले में सख्त कार्रवाई की जा रही है।
इस घोटाले ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में मनमानी और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने की आवश्यकता है। अब देखते हैं कि क्या राजस्थान सरकार इस मामले में सुधार कर पाती है और संबंधित दोषियों के विरुद्ध उचित कानूनी कारवाई की जाती है।