सीएमएचओ की संपत्ति को लेकर हाईकोर्ट ने लोकायुक्त को दिया आदेश, 45 दिन में करें जांच पूरी, दो पत्नी का आरोप

सीएमएचओ की संपत्ति को लेकर हाईकोर्ट ने लोकायुक्त को दिया आदेश, 45 दिन में करें जांच पूरी, दो पत्नी का आरोप

जबलपुर, 30 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में न्यायमूर्ति विशाल धगत की एकल पीठ के द्वारा दिनांक 28 अप्रैल 2025 को याचिकाकर्ता नरेन्द्र कुमार राकेशिया द्वारा दायर रिट याचिका में लोकायुक्त मध्यप्रदेश को याचिकाकर्ता के द्वारा दायर शिकायत की जांच कर तदानुसार कार्यवाही करने के आदेश दिए।

रिट याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को 45 दिनों की अवधि के भीतर जांच पर लिए गए निर्णय से अवगत कराया जाए। याचिकाकर्ता के द्वारा 16 जुलाई 2024 को प्रथम बार और दिनांक 30 अगस्त 2024 को दूसरी बार लोकायुक्त को शिकायत दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि क्षेत्रिय संचालक लोक स्वास्थ्य जबलपुर संभाग तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जबलपुर के पर पर पदस्थ डॉ. संजय मिश्रा ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 22 के तहत उल्लंघन किया है । उन्होंने शासन की अनुमति के बिना दो विवाह किए गए हैं। जिसमें से पहली पत्नि तृप्ति मिश्रा का नाम सेवा पुस्तिका में और दूसरी पत्नि इप्षिता मिश्रा का नाम पेंशन के लिए प्रस्तुत साफ्वेयर में दर्ज किया गया था।

आरोप यह भी है कि कि डॉ. संजय मिश्रा के द्वारा सिविल सर्जन के पद पर कार्य करते हुए भी शासन की अनुमति के बिना एप्पल व परफेट एंडोकेयर लेब आदि अनेक पैथोलाजी केन्द्रों का संचालन किया गया जबकि मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 16 और शासन के निर्देशों के अनुसार प्रशासनिक कार्य करने वाले चिकित्सकों पर प्राइवेट प्रेक्टिस करने की पाबंदी है। इसके अलावा डॉ. मिश्रा के द्वारा पैथोलाॅजी केन्द्रों से प्राप्त होने वाली आय से शासन से अनुमति प्राप्त किए बिना अपनी दूसरी पत्नी इप्श्तिा मिश्रा के साथ ओजस इंपीरिया में लाखों रूपए मूल्य का संयुक्त नाम पर फ्लेट भी खरीदा और खसरा राजस्व अभिलेख में संयुक्त नाम दर्ज कराया।

यह भी आरोप लगाया है कि डॉ. मिश्रा के द्वारा प्राप्त स्वास्थ्य विभाग में प्राप्त नियुक्ति व पदोन्नति अवैध है। शिकायत में यह भी गौरतलब है कि शिकायत पर कार्यवाही न होने पर याचिकाकर्ता के द्वारा पूर्व में भी याचिका दायर की थी ,जिसमें न्यायालय के द्वारा तीन माह बाद पुनः याचिका दायर करने का आदेश जारी किया गया था। उल्लेखनीय है कि इस मामले में पूर्व में दायर याचिका में न्यायालय ने लोकायुक्त की कार्यवाही का तीन महीने इंतजार करने को कहा था यदि लोकायुक्त कार्रवाई नहीं करता है तो पुनः याचिका दायर की जा सकती है। बहरहाल अब देखना है कि दी गई समय सीमा में लोकायुक्त संगठन कार्रवाई करता है या नहीं।

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