आईजीडीटीयूडब्ल्यू ने नरेला में 50 एकड़ जमीन नए कैंपस के लिए अधिग्रहित की : आशीष सूद
नई दिल्ली, 1 मई (हि.स.)। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद गुरुवार को इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय (आईजीडीटीयूडब्ल्यू) के 13वें स्थापना दिवस समारोह और चौथे शोध उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए आशीष सूद ने कहा कि आईजीडीटीयूडब्ल्यू ने दिल्ली के नरेला के सेक्टर जी-2/जी-6 में 50 एकड़ भूमि को नए कैंपसे के लिए अधिग्रहित कर लिया है। यह भूमि आवंटन दिल्ली सरकार द्वारा नरेला में ‘एजुकेशन-सिटी’ विकसित करने के लिए निर्धारित 500 करोड़ रुपए के बजटीय प्रयास का हिस्सा है। आईजीडीटीयूडब्ल्यू का बहुप्रतीक्षित स्थाई परिसर मील का पत्थर साबित होगा। लगभग 50 एकड़ जमीन पर फैले नए परिसर की कल्पना ही प्रेरणादायक है। अब जब वहां छात्राएं पढ़ेंगी तो कह सकेंगी कि ‘जहां तक नजर जाए, वहां तक हमारी यूनिवर्सिटी है।’ उन्होंने कहा कि नया कैंपस भविष्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और नवाचार में महिलाओं के लिए अवसरों का महत्वपूर्ण विस्तार करने के लिए तैयार हो रहा है। जो हमारी सरकार के समावेशी विकास, उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस भूमि के साथ आईजीडीटीयूडब्ल्यू न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व वाले नवाचार, अनुसंधान और अकादमिक उत्कृष्टता में एक अग्रणी संस्थान बनेगा।
मंत्री ने कहा कि आज इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय (आईजीडीटीयूडब्ल्यू ) न केवल तकनीकी शिक्षा में देश का अग्रणी संस्थान बन गया है, बल्कि यह महिलाओं, देश की बेटियों के सशक्तीकरण, रिसर्च और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए अपने काम को लेकर एक मिशाल कायम कर रहा है। 2013 में जब आईजीडीटीयूडब्ल्यू की जब स्थापना हुई थी, तो एक बहुत ही छोटे से कैंपस में हुई थी। आप लोग आज भी उसी वर्षो पुराने कैंपस में हैं। मैं इसे दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के जमाने से जानता हूं।
आज आपलोग भले ही वर्षों पुराने छोटे से कैंपस में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन यह छोटा सा वृक्ष आज वटवृक्ष बनकर पूरे देश और दुनिया में अपना नाम और पहचान कायम कर लिया है। आज इस यूनिवर्सिटी का नाम देश के सर्वश्रेष्ठ तकनीकि विश्वविद्यालय में शुमार होता है। यहां के छात्र, प्रोफेसर्स अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध में नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता के बल पर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर रहे हैं। आज यह विश्वविद्यालय जीरो वेस्ट और जीरो प्लास्टिक कैंपस के रूप में पूरे देश में जाना जाता है।
विश्वविद्यालय के चौथे शोध उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे आशीष सूद ने 103 रिसर्च अवॉर्ड्स, 19 पेटेंट्स और नकद पुरस्कार प्राप्त करने वाले यूजी/पीजी छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि आज यूनिवर्सिटी लगभग 57 लाख रुपए नकद पुरस्कार बांट रही है। जो इस बात का साक्षी है कि जब परिश्रम, संकल्प और सही दिशा एक साथ मिल जाते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
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