लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र बोले: देशविरोधी पोस्ट करने वाले अध्यापकों को जेल भेजें!

लखनऊ विश्वविद्यालय कैंपस में इन दिनों एक गंभीर विवाद छिड़ा हुआ है, जिसमें लिंग्विस्टिक डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. माद्री काकोटी के बाद IMS के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरव बनर्जी पर भी आरोप लगे हैं। छात्रों का कहना है कि दोनों शिक्षकों ने देश विरोधी गतिविधियों में भाग लिया और पाकिस्तान के प्रति समर्थन प्रदर्शित किया। इस स्थिति को लेकर विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों के बीच हंगामा है और ये शिक्षक कड़े विरोध का सामना कर रहे हैं। छात्र संगठनों ने कॉलेज में खुलेआम नारेबाजी करते हुए इनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

डॉ. माद्री काकोटी के मामले के बाद अब डॉ. सौरव बनर्जी के खिलाफ भी ताजा आरोपों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कैंपस प्रशासन ने दोनों शिक्षकों को 48 घंटों के भीतर जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है, परंतु शिक्षक संघ और अन्य फैकल्टी मेंबर इस विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं। हाल में, दैनिक भास्कर के पत्रकारों ने कैंपस में जाकर छात्रों की राय ली और यह पाया कि छात्र गंभीर चिंता जता रहे हैं कि इन शिक्षकों का व्यवहार देश की एकता और अखंडता के विरुद्ध है।

प्रत्यूष पांडे नामक एक रिसर्च स्टूडेंट ने कहा कि इन प्रोफेसरों का काम छात्रों के दिमाग को दूषित कर भारतीयता को कमजोर करना है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. सौरव बनर्जी ने पहलगाम हमले के बाद कभी भी पाकिस्तान के खिलाफ कुछ नहीं कहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे ऐसे विचारों से प्रभावित हैं। छात्रों का तर्क है कि यदि सौरव बनर्जी दोषी नहीं होते तो उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल को डिलीट किया क्यों होता। छात्रों का यह भी मानना है कि लखनऊ विश्वविद्यालय को इन प्रोफेसरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि यह संदेश जाए कि देश के प्रति नकारात्मक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस विवाद की जड़ें डॉ. माद्री काकोटी के वायरल पोस्ट से जुड़ी हैं, जिसके बाद छात्रों ने उनके खिलाफ हंगामा शुरू किया था। काकोटी के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था, और उनकी स्थिति गंभीर दिख रही है। दूसरी ओर, डॉ. सौरव बनर्जी की स्थिति भी अब गंभीर होती जा रही है, क्योंकि उन पर भी देशद्रोह के आरोप लगने की संभावना है। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र संगठन एबीवीपी के सदस्यों ने कैंपस में डॉ. बनर्जी के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है और उनकी अनर्गल टिप्पणियों की कड़ी निंदा कर रहे हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दुर्गेश ने भी इस पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं कि इस तरह की टिप्पणियों से न केवल विश्वविद्यालय का मान घटता है, बल्कि समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह स्पष्ट हो रहा है कि छात्र इन शिक्षकों के प्रति अपने मन में भारी रोष रखते हैं और चाहते हैं कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य शिक्षक या छात्र के लिए ऐसी बयानबाजी करना संभव न हो।