UP के RTO में दलालों का साम्राज्य: फीस से 5 गुना वसूली, अफसरों की करोड़ों की कमाई!

24 मार्च, 2025 को झांसी में एक स्कूल बस के पलटने से 15 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना तब हुई जब उत्तर प्रदेश में पिछले तीन महीनों में स्कूल बसों के छह बड़े हादसे सामने आए हैं, जिनमें 50 से अधिक बच्चों को चोटें आई हैं। इन दुर्घटनाओं की एक प्रमुख वजह तेज रफ्तार और खराब स्थिति की बसें थीं। सवाल यह उठता है कि ऐसे ड्राइवरों को हैवी ड्राइविंग लाइसेंस और पुरानी बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट कैसे मिल जाते हैं। दैनिक भास्कर की एक टीम ने यह पता लगाने के लिए यूपी के आरटीओ दफ्तरों में 20 दिन बिताए, और इस दौरान पाया कि यहां दलालों का ही बोलबाला है। ये दलाल भीतर ही बैठे अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हैं, और लोगों से अधिक पैसे वसूल करते हैं।

सीतापुर के आरटीओ दफ्तर से जांच की शुरुआत करते हुए रिपोर्टरों ने पाया कि वहां करीब 50 दुकानदार बाहर ही लोगों को काम कराने के लिए रोक लेते हैं। वहां मिले दलाल रमेश राठौर ने बताया कि सभी अधिकारी रिश्वत लेकर काम करते हैं। जब रिपोर्टरों ने स्कूल बसों का फिटनेस और परमिट करवाने की बात की, तो रमेश ने उन्हें आश्वासन दिया कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। उसने साफ तौर पर बताया कि बगैर पैसे दिए, कोई काम नहीं कराएगा। इसी तरह की बातचीत लखनऊ और अन्य जिलों में भी जांच के दौरान हुई, जहां दलाल अलग-अलग खर्च बताकर सरकारी फीस से कई गुना अधिक वसूलते हैं।

लखीमपुर, बहराइच, और बाराबंकी में भी यही स्थिति थी। दलाल सुरेंद्र त्रिवेदी ने बिना शैक्षणिक प्रमाण पत्र के हैवी लाइसेंस बनवाने का दावा किया और इस काम के लिए 11 हजार रुपए की मांग की। इसी तरह अन्य जिलों में भी दलालों ने विभिन्न खर्चों की बातें कीं और बताया कि काम करने के लिए पैसे देना जरूरी है। खासकर बाराबंकी में, दलाल ने सीधे-सपाट शब्दों में कहा कि बिना पैसे दिए कोई भी अंदर नहीं जाएगा।

अंततः, इस जांच से साफ हुआ कि उत्तर प्रदेश के आरटीओ दफ्तरों में दलालों की गतिविधियों ने वहां की प्रणाली को प्रभावित किया है। रिपोर्ट से ज्ञात हुआ कि आरटीओ अफसर एक दिन में लाखों रुपये कमा रहे हैं, जबकि दलाल भी अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। दलालों के पास जाने से लोगों को जल्दी काम कराने का भरोसा रहता है, जिससे लोग मजबूरन उनसे संपर्क करते हैं। इस प्रकार, भ्रष्टाचार की इस जड़ तक पहुंचने के लिए और अधिक कठोर कदम उठाने की आवश्यकता महसूस होती है।

ये घटनाएं न केवल स्कूल बसों से संबंधित हैं, बल्कि इस पूरे सिस्टम की नाकामी को भी दर्शाते हैं। लोगों की सुरक्षा को ताक पर रखकर चल रहे इस खेल को रोकने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि आने वाले समय में ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके।