रेलवे ठेकेदार 64 लाख के घोटाले में फंसे, CBI ने दर्ज की FIR!

जोधपुर के राइका बाग रेलवे स्टेशन के पार्किंग स्टैंड से जुड़े ठेकेदार पर 21 लाख रुपए के फ्रॉड के आरोपों की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही थी कि तभी एक और गंभीर मामला सामने आया है। अब इस ठेकेदार के साथ मिलकर पांच अन्य ठेकेदारों पर भी मानसिकता से मिलकर काम करते हुए 64 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। इन आरोपियों ने कुछ रेलवे कर्मचारियों के साथ साठ-गांठ कर कई ठेकों में गड़बड़ की है, जिनमें से कुछ पार्किंग और कुछ पे-एंड-यूज शौचालयों के संचालन से संबंधित हैं। यह धोखाधड़ी उस तरीके से की गई है जैसे पहले राइका बाग रेलवे स्टेशन की पार्किंग से जुड़े मामले में सामने आई थी।

सीबीआई द्वारा 2 मई को दर्ज की गई एफआईआर में जोधपुर मंडल के वरिष्ठ डीसीएम विकास खेड़ा द्वारा 21 अप्रैल को प्रस्तुत की गई शिकायत का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल में पार्किंग स्टैंड और स्टेशन पर शौचालयों के संचालन के लिए कॉन्ट्रेक्ट किए गए थे, जिनकी अवधि मई 2022 से मई 2024 तक निर्धारित थी। इसमें विभिन्न ठेकेदारों को विभिन्न श्रेणियों के लिए ठेके दिए गए थे, जैसे कि लोकेश चंद मीणा को 4 व्हीलर पार्किंग, मै. संगम आर्ट को शौचालय, और अन्य ठेकेदारों को भी कार्यपत्र दिए गए थे। इन सभी स्थानों से वित्तीय गबन का खुलासा हुआ है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो गई।

सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इन ठेकेदारों ने रेलवे के नियमों का उल्लंघन करते हुए कुल 39 लाख रुपए से अधिक के 15 डिमांड ड्राफ्ट बनाए, जिनमें से अधिकांश को रेलवे कर्मियों की मिलीभगत से रद्द कराकर खुद भुना लिया गया। इसके अतिरिक्त, ठेकेदारी की अवधि में ठेकेदारों ने अपने लाइसेंस शुल्क और अन्य जरूरी राशि भी जमा नहीं की, जिससे कुल मिलाकर रेलवे को 64.62 लाख रुपए का नुकसान हुआ। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे ठेकेदारों ने रेलवे प्रशासन के साथ मिलकर फ्रॉड किया।

इस संदर्भ में, एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पहले की एक एफआईआर में भी सीबीआई ने रेलवे की महिला अधिकारी मनीला चौहान सहित अन्य को ठेका देने में शामिल होने के लिए नामजद किया था। उस प्रकरण में भी ठेकेदारों ने पार्किंग का ठेका लेते हुए लाइसेंस शुल्क के लिए बनाए गए डिमांड ड्राफ्ट को अपने ही खाते में भुना लिया था। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मनीला चौहान ने रेलवे के राजस्व को अपंग करते हुए 19 डिमांड ड्राफ्ट खुद ही भुना लिए, जिससे रेलवे को 20.95 लाख रुपए से अधिक का घाटा हुआ।

इस प्रकार, सीबीआई अब इन ठेकेदारों और रेलवे कर्मियों के गठजोड़ की जांच में जुटी है। यह देखा जाना बाकी है कि क्या इन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या नहीं। इस मामले ने एक बार फिर से यह सवाल उठाया है कि सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाए, ताकि ऐसी धोखाधड़ी के मामले भविष्य में न हो सकें।