PMO में नई CBI डायरेक्टर की नियुक्ति पर बैठक: शामिल हुए राहुल, CJI संजीव खन्ना!

सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) निदेशक की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने भी भाग लिया। वर्तमान CBI निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल 25 मई को समाप्त हो जाएगा। सूद, जो कर्नाटक कैडर के 1986 बैच के IPS अधिकारी हैं, ने 25 मई, 2023 को इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी। CBI निदेशक का कार्यकाल दो साल निर्धारित है, जिससे सीबीआई की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और स्थिरता सुनिश्चित की जाती है।

प्रवीण सूद का जन्म हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में हुआ था और उनके पिता ओम प्रकाश सूद दिल्ली सरकार में क्लर्क रहे हैं। वहीं, उनकी मां कमलेश सूद दिल्ली के सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं। प्रवीण की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के सरकारी स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री प्राप्त की। IPS बनने के बाद सूद ने पुलिस सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें बेल्लारी और रायचूर में SP और बेंगलुरु तथा मैसूरु में DCP के पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें विभिन्न पुरस्कारों जैसे 1996 में CM द्वारा गोल्ड मेडल और 2002 में पुलिस पदक प्राप्त हुए हैं।

CBI निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता मिलकर नियमानुसार नाम तय करते हैं। इस बैठक के बाद गृह मंत्रालय से निर्देश आने पर, डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DOPT) इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि निदेशक का चयन प्रक्रिया पारदर्शी और जिम्मेदारी से की जाए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को सीबीआई निदेशक के पद के लिए तब विचार किया जा सकता है जब उनके रिटायरमेंट में छह महीने से अधिक का समय शेष हो। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि CBI निदेशक का कार्यकाल दो साल से कम नहीं हो सकता और उनकी नियुक्ति समिति की सहमति से ही स्थानांतरित की जा सकती है। यह सभी प्रावधान केंद्र सरकार के सेंट्रल विजिलेंस कमीशन एक्ट 2003 के तहत निर्धारित किए गए हैं, जो CBI के संचालन में नियमों की स्पष्टता को बढ़ाता है।

इसी बीच, एक अन्य महत्वपूर्ण न्यायिक घटना में, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक बताने वाले मामले को बंद कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने राहुल की नागरिकता से संबंधित कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की, जिससे मामला लंबित नहीं रखा जा सकता। यह फैसला दर्शाता है कि न्यायालय ने केवल रिपोर्ट के इंतजार में याचिका को लम्बित नहीं रखने का निर्णय किया है, जो कि भारतीय न्यायपालिका की तात्कालिक और निष्पक्ष विधि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।