जीवन को खुशियों से भरने के लिए सकारात्मक भावना का मंत्र अपनाएं : चन्द्रप्रभ

जीवन को खुशियों से भरने के लिए सकारात्मक भावना का मंत्र अपनाएं : चन्द्रप्रभ

जोधपुर, 12 मई (हि.स.)। संबोधि साधना के प्रणेता संत चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि हमें हर समय सकारात्मक भावना रखनी चाहिए। मैं सुखी आत्मा हूँ, मेरी हर सोच, हर शब्द और हर व्यवहार दूसरों को सुख पहुँचाने वाले हों। मैं दूसरों को वो जैसे भी हैं बिना किसी शिकायत के स्वीकार करता हूँ। मैं स्वयं खुश हूँ और दूसरों को खुशियाँ देने का प्रयास करता हूँ। मैं परमात्मा के सान्निध्य में हूँ और मेरा हर कर्म परमात्मा को समर्पित है। ये सकारात्मक विचार हमारे लिए और सबके लिए मंगलपाठ का काम कर सकते हैं। वे कायलाना रोड़ स्थित साधना-स्थली संबोधि धाम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रेम, प्रसन्नता और पुरुषार्थ इन तीनों को जीवन में जोड़े रखना चाहिए-ये हमें जीवन का माधुर्य देते हैं, तन-मन को खुशियों से भरते हैं और हमारा सोया भाग्य जागाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस घर के सभी सदस्यों में पारस्परिक प्रेम, मिठास और त्याग की भावना रहती है, वहाँ देवीय कृपा सदा बनी रहती है। हम कलह करके द्वेष की दिवारें न बनाएँ, जो हम सबको अलग-अलग करें अपितु प्रेम के पुल बनाएँ, जो अलग-अलग को भी आपस में जोड़ दें। परिवार में प्रेम रहेगा तो 10 लोग मिलकर घर में स्वर्ग का निर्माण कर लेंगे अन्यथा हर व्यक्ति के बीच में नफरत की दिवार खड़ी हो जाएगी।

चन्द्रप्रभ ने जीवन को सहज जीने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हम दूसरों को अपनी इच्छानुसार कभी भी ठीक नहीं कर पाएंगे। इसलिए ठीक करने की शुरुआत हमें अपने आप से करनी चाहिए। हम कोशिश करें हमारे द्वारा दूसरों को भरपूर प्रसन्नता मिले। जीवन में वही व्यक्ति खुशियों का मालिक बन सकता है, जो इन्हें बटोरने की बजाय दूसरों में बाँटता है।

संत ने पुरुषार्थ की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमें सदा मेहनत करते रहना चाहिए। आज नहीं तो कल उसके पुण्य जरूर जागृत होते हैं, जो पुरुषार्थ पर भरोसा रखता है। मेहनत की मोमबत्ती जलाकर जीवन के अंधेरे को दूर किया जा सकता है। हम बचपन में पढ़ाई के लिए श्रम करें, जवानी में कमाई के लिए श्रम करें, प्रौढ़ अवस्था में सामाजिक कार्य एवं मानवीय हितों के लिए पुरुषार्थ करें, पर बुढ़ापे में हमारे कदम अध्यात्म और मोक्ष की ओर बढ़ जाने चाहिए। इस अवसर पर साधकों ने मानसिक शांति और आध्यात्मिक आनंद पाने के लिए ओंकार मंत्र ध्यान का प्रयोग किया। योग थैरेपिस्ट लालचंद कानजानी ने सभी को योग और प्राण ऊर्जा बढ़ाने के लिए प्राणायाम का विशेष अभ्यास करवाया।