राजस्थान में चित्रकूट क्षेत्र के एक ज्वेलर के घर हुई डकैती और गैंगरेप की घटना ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। इस मामले में डकैतों ने लाखों की ज्वेलरी लूटने के साथ-साथ ज्वेलर की पत्नी के साथ कुकृत्य भी किया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में सम्भावना जताई थी कि इस वारदात में बांग्लादेशी गिरोह का हाथ हो सकता है। अब इस जघन्य अपराध की सच्चाई को उजागर करने के लिए पुलिस ने अपना अभियान तेज कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से एक सिम कार्ड बरामद हुआ था, जिसके जरिए बदमाशों के संबंधों का पता लगाने में मदद मिली। इस सिम कार्ड की कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रेस करके पुलिस ने डकैतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई। इसके परिणामस्वरूप पुलिस को पता चला कि जयपुर के आसिफ और राशिदा नाम के दो संदिग्ध व्यक्तियों का इसमें हाथ है। जांच में ऐसा भी पाया गया कि राशिदा ने अपने किराये के मकान को छोड़कर भांकरोटा चले गई थी, जहां बादशाह नामक व्यक्ति के पास रहने लगी थी।
पुलिस की गहन जांच में यह भी उजागर हुआ कि राशिदा ने अपनी कच्ची बस्ती में बांग्लादेश से आए डकैतों को शरण दी थी। मोहम्मद आसिफ और सलीम नामक कबाड़ी भी इस गिरोह में शामिल थे। ये सभी जयपुर में अवैध रूप से रह रहे थे। तब पुलिस सबूत इकट्ठा करने में जुट गई। 16 अक्टूबर 2014 को आसिफ, जिसे दाऊद भी कहा जाता है, को मथुरा से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान आसिफ ने अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी दी, जिससे पुलिस ने उनकी लोकेशन का पता लगाने में मदद पाई।
डकैतों ने वारदात के बाद अपना सामान बांटने और हथियार छिपाने के लिए राशिदा के ठिकाने पर इकट्ठा हुए थे। उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग रास्तों से भागने का निर्णय लिया और आगरा होते हुए पश्चिम बंगाल पहुंच गए। इसी बीच, पुलिस ने उनकी लगातार निगरानी जारी रखी।
जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के बाद डकैत पीड़िता के फोन से फोटो खींचने का मन बना रहे थे, जिससे उन्हें अपनी पहचान परदा डालने का एक अवसर मिला। लेकिन उनका यह शौक उन पर भारी पड़ गया। जब पीड़िता ने अपने ईमेल में संदिग्ध तस्वीरें देखी, तो उसने पुलिस को इसकी सूचना दी।
इन तस्वीरों और अन्य सबूतों के चलते, जयपुर पुलिस ने बांग्लादेश में डकैतों के खिलाफ जांच तेज कर दी। बांग्लादेश पुलिस की मदद से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन रफीक ने भागने में सफल रहे।
इस मामले में अभी भी कई आरोपी फरार हैं, जो बांग्लादेश में छिपे हुए हैं। पुलिस ने इनकी वापसी के लिए सीबीआई और इंटरपोल की मदद लेने की कोशिश की है, लेकिन तथ्यों की कमी और समय के साथ मामला ठंडा हो गया। कई साल गुजरने के बाद भी डकैतों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
इस घटिया घटना ने न सिर्फ ज्वेलर के परिवार को प्रभावित किया है, बल्कि यह पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर देती है कि जब अपराध को अंजाम देने वाले इतनी आसानी से भागने में सफल होते हैं, तो समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है। पुलिस अब इन फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए अपनी गतिविधियों को पुनः सक्रिय करने की योजना बना रही है।