मिली जानकारी अनुसार, अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) संघ के जिला प्रतिनिधि मंडल के द्वारा आज साेमवार काे बलरामपुर स्थानीय सर्किट हाउस में कैबिनेट मंत्री राम विचार नेताम से मुलाकात कर अपनी मांग के संबंध में ज्ञापन सौंपा। उनकी मांगों को ध्यान से सुनते हुए रामविचार नेताम ने आश्वासन दिया कि, आप सभी का कार्य सराहनीय है। आप सभी निरंतर कार्य में लगे हुए हैं। आपकी मांगों के संबंध में हम मुख्यमंत्री के समक्ष रखते हुए यथासंभव नियमानुसार जो भी उचित हो उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे।
उल्लेखनीय है कि, भाजपा सरकार द्वारा 2016 में सरगुजा एवं बस्तर में विद्या मितान को हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलाें में सम्बन्धित विषय में स्नातकोत्तर एवं बीएड अहर्ता धारी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार रखा गया था। बाद में पूरे प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की भर्ती की गई थी।
संघ के जिला प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि, बच्चों का भविष्य बनाने वाले यह अतिथि शिक्षक (विद्या मितान) अपने भविष्य के प्रति ससंकित हैं क्योंकि उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई भी सरकार उचित कदम नहीं उठा रही है। प्रदेश में आज भाजपा की सरकार है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सभी नेता मंत्री लोगों के साथ मुलाकात कर अपनी जायज मांगों को पूरा करने के लिए ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगों को रख रहे हैं। जहां कहीं भी अतिथि शिक्षक पदस्थ हैं। जहां भी नियमित शिक्षकों की भर्ती है। वहां सभी कार्य शुरू से करते आ रहे हैं, जैसे कक्षा शिक्षक, आई.सी.टी. प्रशिक्षण, चुनाव निर्वाचन, एन.एस.एस. प्रभारी, छात्रवृत्ति प्रभारी, बोर्ड परीक्षा कार्य (पर्यवेक्षक, बाह्य पर्यवेक्षक, 10वी, 12वी, पेपर मुल्यांकन) आदि कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि, अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) कई वर्षों से स्कूली शिक्षा विभाग में संविलियन की माग करते आ रहे हैं। समय-समय पर शासन द्वारा कई आदेश पत्र भी जारी की गई, जिसमें यह कहा गया कि जिन शालाओं में अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं वहा पर किसी भी नियमित शिक्षकों की सीधी भर्ती, पदोन्नती एवं स्थानान्तरण नही किया जाना है। क्योकि अतिथि शिक्षक की संविलियन की मांग की जा रही है। अर्थात रिक्त पद की जानकारी में कार्यरत अतिथि शिक्षक के पद को भरा हुआ मानकर जानकरी मंगाई जाती है।
अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगे
– 12 माह का नियमित मानदेय प्रदान किया जाए।
– नियमित व्याख्याता की भाति समस्त शासकीय अवकाश की पात्रता प्रदान की जाए।
– अतिथि शिक्षक का नाम परिवर्तीत कर ‘व्याख्याता विषय’ की जाए।
– कम से कम समान काम समान वेतन (बेसिक रूपये 38100) प्रदान कीया जाए।
– अतिथि शिक्षकों की सेवा अर्द्धवार्षिकी आयु (62 वर्ष) तक की जाए।