संघ के प्रचार विभाग के मुताबिक, मानकचंद पिछले 60 वर्षों से संघ के प्रचारक के थे। उन्होंने 34 वर्षों तक पाथेय कण पत्रिका के प्रबंध संपादक के रूप में कार्य किया। वे आपातकाल के दौरान जेल भी गए। संघ कार्य के प्रति उनका समर्पण, अनुशासन और वैचारिक स्पष्टता उन्हें प्रचारकों की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। पाथेय कण के माध्यम से उन्होंने वैचारिक जागरूकता का जो कार्य किया, वह लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा। उनके निधन से संघ परिवार, पाथेय परिवार एवं भारतीय विचार की पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है।