अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने विभाग द्वारा अर्जित की गई उपलब्धियां पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2002 के दौरान बाजारा सुधार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए द्विवार्षिक आईसीएआर टीम द्वारा अनुसंधान पुरस्कार प्रदान किया गया। वर्ष 2003 के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा चौधरी देवीलाल सर्वश्रेष्ठ अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना पुरस्कार, पांच बार आईसीएआर-एआईसीआरपी द्वारा सर्वश्रेष्ठ एआईसीआरपी बाजरा केन्द्र पुरस्कार दिया गया। इसके अतिरिक्त विभाग ने अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने पर भी अनेक पुरस्कार प्राप्त किए हैं।हरियाणा में बाजरा की फसल एक नजर में
बाजरा अनुभाग, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल यादव ने बताया कि बाजरा अनाज और चारे के लिए एक महत्वपूर्ण फसल है। बाजरा मुख्यत: महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, चरखी दादरी, हिसार तथा झज्जर जिलों में बोया जाता है। इन क्षेत्रों में कम वर्षा और उच्च तापमान होता है। जो की बाजरा कि फ़सल के लिए उपयुक्त है। उन्होंने बताया कि किसानों के सामने जो प्रमुख चुनौतियां हैं उनमें बाजार की अनिश्चिता, नवीनतम विकसित संकर उन्नत बीजों तक सीमित पहुंच और वैज्ञानिक खेती पद्धतियों का कम अपनाना शामिल है। गत पांच वर्षों के दौरान प्रदेश में बाजरा का रकबा 4.83 से 5.74 लाख हेक्टेयर के बीच रहा है तथा बाजरा का उत्पादन 10.62 से 16.62 लाख टन के बीच रहा है और उत्पादकता 2311 से 2897 किलोग्राम/हेक्टेयर के बीच रही है। जो प्रमुख बाजरा उत्पादक राज्यों में देश में सबसे अधिक है। उन्होंने बताया कि समझौता ज्ञापन भागीदारों द्वारा भी बड़े स्तर पर हाईब्रिड बीज का उत्पादन किया जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. सुरेन्द्र यादव, डॉ. देवव्रत यादव, डॉ. विनोद मलिक, डॉ. नीरज खरोड़, डॉ. हर्षदीप, डॉ. पंकज व डॉ. ज्योति उपस्थित रहे।