इस पर्यावरणीय जागरूकता अभियान के तहत लगभग तीन सौ फलदार पौधे वितरित किया गया। आयोजकों ने ग्रामीणों को बीज बॉल तैयार करने की विधि भी सिखाई और पृथ्वी की हरियाली को बनाए रखने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आदिवासी समाज की प्रकृति-निर्भर जीवनशैली को सजगता के साथ सामने लाना था। आनंद मार्ग के सुनील आनंद ने बताया कि जब तक हम पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को अपने परिवार का हिस्सा नहीं मानेंगे, तब तक प्रकृति का संतुलन नहीं बन सकता।
उन्होंने कहा कि नव्य मानवतावाद इसी सोच पर आधारित है और आदिवासी समाज इसे अपने व्यवहार में पहले से ही आत्मसात किए हुए है। आदिवासी समुदाय की आस्था प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम में निहित है और यही उन्हें नव्य मानवतावाद का जीवंत उदाहरण बनाता है। आनंद मार्ग संस्था की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में है, बल्कि समावेशी सोच को भी सशक्त करती है।