डीएम ने प्रत्येक गौशाला की स्थिति की जानकारी संबंधित पशु चिकित्साधिकारी, खंड विकास अधिकारी और नोडल अधिकारियों से ली। उन्होंने कहा कि जहां गौशाला की सड़क कच्ची है, वहां तुरंत खड़ंजा डलवाया जाए। बाउंड्रीवाल विहीन गौशालाओं के लिए शीघ्र स्टीमेट तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही विद्युत कनेक्शन रहित गौशालाओं की सूची भी मांगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी एनजीओ द्वारा लापरवाही की जा रही है तो कार्रवाई की जाए। एनजीओ का नवीनीकरण उनकी वार्षिक कार्यप्रणाली के आधार पर ही किया जाए।
बैठक में बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक भी हुई। इसमें पशुपालन, वन, गृह, पंचायती राज, सिंचाई, लोक निर्माण, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को टीम भावना से काम करने और सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों को आमजन को जागरूक करने के लिए भी कहा गया। बैठक में बताया गया कि बर्ड फ्लू, जिसे एवियन इन्फ्लूएंजा कहा जाता है, पक्षियों में इन्फ्लूएंजा टाइप ए वायरस से फैलता है। यह हल्की बीमारी से लेकर मृत्यु तक का कारण बन सकता है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी देवयानी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, डीसी मनरेगा हसीब अंसारी, डीसी एनआरएलएम, नामित नोडल अधिकारी और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।