उप मुख्य सचेतक ने उप कृषि निदेशक संग किया धान के खेतों का दौरा

किसानों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस वायरस से प्रभावित पौधे अपनी सामान्य ऊँचाई के केवल एक-तिहाई तक ही बढ़ पाते हैं, जड़ें कमजोर हो जाती हैं और समय से पहले फसल नष्ट होने का खतरा रहता है।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से विकास खंड रैत के कई गांवों में इस वायरस के प्रकोप की सूचना मिली है। कृषि विभाग लगातार सर्वेक्षण कर रहा है और किसानों को रोकथाम के उपाय बता रहा है। यह बीमारी एक वायरस के कारण होती है, जिसे व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर नामक कीट फैलाता है।

शाहपुर के प्रेई, लदवाड़ा, 45 मील, बसनूर, दरगेला, पुहाड़ा और नेरटी गांवों के किसान इससे प्रभावित हैं जबकि बोह, दरीणी और चंगर क्षेत्र में इस बीमारी का प्रकोप नहीं पाया गया है।

पठानिया ने बताया कि विकास खंड रैत में लगभग 2930 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है, जिनमें से करीब 25-30 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है।