आदिवासी मूलवासियों की खेती योग्य जमीन छीनने में क्यों तुली है सरकार : गीताश्री

मौके पर गीताश्री उरांव ने कहा कि जब सरकार जानती हैं कि नगड़ी की यह जमीन खेती योग्य है। सालों से रैयत यहां की खेतों में खेती बाड़ी करते आए हैं। फिर आदिवासी मूलवासियों के विरोध में सरकार खेती योग्य भूमि को छीनने में क्यों तुली है। वह भी वैसी स्थिति में जब किसान खुद विकास चाहते हैं। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि सरकार मनमानी करके खेती योग्य भूमि में ही विकास कार्य खड़ा करे। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस परियोजना को वैसी भूमि पर स्थापित करे, जहां खेती नहीं होती हो।

इस कार्यक्रम में विभिन्न आदिवासी मूलवासी संगठनों के अगुवा लक्ष्मी नारायण मुंडा, निरंजना हेरेंज टोप्पो, फुलचंद तिर्की, कुन्दरसी मुंडा, हर्षिता मुंडा, अमर तिर्की, लक्ष्मी मुंडा, निशा भगत, राहुल तिर्की, डब्लू मुंडा, दरिद्र पहान, सुनील होरो, शिवरतन मुंडा उर्मिला भगत समेत झारखंड के सभी जिलों से हजारों आदिवासी मूलवासी शामिल हुए।