नौ चरण में पूरी हुई सांवलिया सेठ के भंडार की गणना

चित्तौड़गढ़, 9 सितंबर । वैश्विक आस्था के केंद्र कृष्णधाम भगवान श्री सांवलिया सेठ के करीब एक पखवाड़ा पूर्व खोले गए भंडार की गणना नो चरण में जाकर पूरी हुई है। भंडार और भेंट कक्ष में मिला कर करीब 28 करोड़ की चढ़ावा राशि आई है। इसके अलावा करीब पौने दो किलो सोना तथा करीब 143 किलो चांदी प्राप्त हुई है। एक बार भंडार खोलने के बाद श्रद्धालुओं की लगातार भीड़ तथा तीन दिवसीय जलझूलनी एकादशी मेले में कर्मचारियों की व्यस्तता के कारण इस बार भंडार की गणना नो चरणों में पूरी हुई है। ऐसा पहली बार हुआ है कि भंडार की गणना के लिए नो चरण करने पड़े हो।

जानकारी के अनुसार गत कृष्णपक्ष चतुर्दशी के पावन पर्व भगवान श्री सांवलिया सेठ का भंडार खोला गया था। चतुर्दशी को पहले चरण की गणना में ठाकुरजी के भंडार से 08 करोड़ 90 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। दूसरे चरण की गणना में 04 करोड़ 60 लाख, तीसरे चरण में 03 करोड़ 86 लाख 50 हजार, चौथे चरण की गणना में 02 करोड़ 50 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। इसी प्रकार पांचवें चरण की गणना में 02 करोड़ 10 लाख, छठे चरण में 84 लाख, सातवें चरण में 42 लाख व आठवें चरण की गणना में 17 लाख 50 हजार रुपए की राशि प्राप्त हुई। वहीं मंगलवार को नवें व अंतिम चरण की गणना की गई। नवें चरण की गणना में 22 लाख 12 हजार 206 रुपए की राशि प्राप्त हुई। सभी चरणों की गणना में ठाकुरजी के भंडार से इस माह कुल 23 करोड़ 62 लाख 12 हजार 206 रुपए की नकद राशि प्राप्त हुई। मंगलवार को गणना करने के बाद इस माह की गणना का समापन हुआ। साथ ही भगवान श्री सांवलिया सेठ के भंडार से 01 किलो 270 ग्राम सोना तथा 70 किलो चांदी भी प्राप्त हुई। इधर, श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल के भेंट कक्ष कार्यालय में नगद व मनीऑर्डर के रूप में 04 करोड़ 75 लाख 33 हजार 304 रुपए के अलावा 565 ग्राम 590 मिलीग्राम सोना तथा 73 किलो 780 ग्राम चांदी भी भेंट स्वरूप प्राप्त हुई। मंगलवार को मंदिर मंडल बोर्ड के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव, बोर्ड सदस्य किशनलाल अहीर, पवन तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी द्वितीय व लेखाकार राजेंद्रसिंह, मंदिर व्यवस्था व संपदा प्रभारी भैरूगिरी गोस्वामी, सुरक्षा प्रभारी गुलाबसिंह, संस्थापन प्रभारी लेहरीलाल गाडरी, वरिष्ठ सहायक कालूलाल तेली, स्टोर प्रभारी मनोहर शर्मा सहित मंदिर मंडल तथा क्षेत्रीय बैंकों के कर्मचारियों की मौजूदगी में ठाकुरजी का भंडार से प्राप्त राशि की गणना पूरी की।