एसएलपी में अधिवक्ता ऋषभ संचेती ने कहा कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए चयनित अभ्यर्थियों को फील्ड ट्रेनिंग कराने की छूट दी है। जबकि फील्ड ट्रेनिंग में कुछ हद तक ट्रेनी एसआई को स्वतंत्र निर्णय और काम करने की छूट दी जाती है। इसके अलावा एकलपीठ ने जिन रिपोर्ट्स के आधार पर भर्ती को रद्द करने योग्य माना था, खंडपीठ ने उन रिपोर्ट्स को अप्रमाणित मान लिया। जबकि सुप्रीम कोर्ट राफेल केस में तय कर चुका है कि दस्तावेज किसी भी माध्यम से मिला हो, यदि वह सही है तो कोर्ट उसे नजरअंदाज नहीं कर सकती। वहीं यदि दागियों को ट्रेनिंग दी जाएगी तो इससे आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास कम होगा। वहीं दूसरी ओर खंडपीठ के अपीलार्थी अमर सिंह व विक्रम पंवार की ओर से मामले में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट पेश की गई है।