का फैसला सुनाया है।
मामला 12 जून 2023 का है, जब 30 वर्षीय महिला पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थी। डॉक्टर ने एलिसा स्क्रीनिंग टेस्ट कराया, जिसमें उसे एचआईवी पॉजिटिव बताया गया। इस रिपोर्ट से महिला और उसका परिवार मानसिक पीड़ा और अपमान का सामना करने पर मजबूर हो गया। संदेह होने पर महिला ने दूसरी जगह जांच कराई, जिसमें वह एचआईवी नेगेटिव पाई गई। इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग में पहुंचा।
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता संजीव पांडेय ने पैरवी की। अधिवक्ता ने शनिवार काे बताया कि इस मामले में शुक्रवार देर शाम चली सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि पालीवाल पैथोलॉजी और संबंधित डॉक्टरों ने जांच रिपोर्ट तैयार करने में गंभीर लापरवाही बरती है। आयोग ने कहा कि ऐसी गलत रिपोर्ट से मरीज और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होती है और मानसिक आघात भी पहुंचता है।
इस पर पालीवाल पैथोलॉजी ने आयोग में सफाई देते हुए दावा किया कि उन्होंने कोई गलती नहीं की, लेकिन रिकॉर्ड और रिपोर्टों की गहन जांच के बाद आयोग ने उनकी दलीलें खारिज कर दीं। आयोग ने स्पष्ट कहा कि मरीज को गलत रिपोर्ट देने की वजह से मानसिक उत्पीड़न और अपमान का सामना करना पड़ा, इसलिए मुआवजा और ब्याज देना अनिवार्य होगा।