याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पति कार्मिक विभाग से सितंबर, 1994 में सहायक सचिव पद से रिटायर हुए थे। इसके बाद उनकी पेंशन आरंभ हो गई। वहीं अगस्त, 2008 में पति का निधन होने पर विभाग ने याचिकाकर्ता को फैमिली पेंशन देना शुरू कर दिया। याचिका में कहा गया कि 26 दिसंबर, 2024 को कोषागार अधिकारी ने याचिकाकर्ता को पत्र लिखकर जानकारी दी कि उसे 8.76 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान हो गया है और संबंधित बैंक को कोषागार के पक्ष में इस राशि का डीडी जमा कराने को कहा गया है। याचिका में कहा गया कि इस पत्र के आधार पर बैंक ने गत जनवरी माह से उसकी पेंशन का भुगतान रोक लिया। याचिका में कहा गया कि वह 88 साल की महिला है और पूरी तरह इस पेंशन पर आश्रित है। इसके अभाव में बीते करीब नौ माह से उसका जीवन यापन कठिन हो रहा है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट भी तय कर चुका है कि यदि किसी रिटायर व्यक्ति को अतिरिक्त राशि का भुगतान भी हो गया है तो उसकी रिकवरी नहीं की जा सकती। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने पेंशन रोकने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।