देसंविवि में हिमालय पर्यावरण संवाद कार्यक्रम, पर्यावरण संतुलन के सुझाए उपाय

वे 4225 वृक्षों की छाया में बसे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित हिमालय पर्यावरण संवाद कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जब हम ईश्वरीय उपहारों एवं प्रकृति का सम्मान करना भूल जाते हैं, तभी विभिन्न समस्याएं खड़ी होती है। प्राणिमात्र द्वारा उपयोग किये जाने वाले प्रत्येक संसाधनों का मूल स्रोत धरती ही है।

संवाद कार्यक्रम के अध्यक्ष व देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत की भूमि देवों की भूमि है। भारत हमारी माता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति से उबरने के लिए हमें उनसे अपनेपन के साथ जुडना होगा। तभी भारत समृद्ध होगा और पर्यावरण का संतुलन होगा। बताया कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय व शांतिकुंज कई दशकों से जीरो कार्बन फूटप्रिंट क्षेत्र है। गायत्री परिवार विगत कई दशकों से इस दिशा में कार्य कर रहा है।

विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के न्यायाधीश अफरोज अहमद ने कहा कि मुझे गायत्री परिवार के कई कार्यक्रमों मेें शामिल होने का मौका मिला है। आचार्यश्री के विचारों में महान व्यक्तित्व गढने का सूत्र भरा है। न्यायाधीश ने कहा कि पर्यावरण संतुलन हेतु प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग नहीं, सदुपयोग करना चाहिए। भारतीय नदी परिषद् के अध्यक्ष रमन कांत ने पौराणिक ग्रंथों के विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन बनाये रखने के साथ ही भौतिक विकास करने की वकालत की। राष्ट्रीय नदी परिषद् के सलाहकार श्री मनु गौड़ ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए पर्यावरण को बचाये रखना आवश्यक है।

इससे पूर्व अतिथियों ने प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना कर हिमालय और पर्यावरण को बचाये रखने हेतु विशेष प्रार्थना की। साथ ही वीर सैनिकों की याद में बने शौर्य दीवार पर अपनी भावांजलि अर्पित की। डॉ पण्ड्या एवं केन्द्रीय मंत्री श्री यादव सहित अतिथियों ने विभिन्न पत्रिकाओं का विमोचन किया। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, जिला प्रशासन के अनेक अधिकारीगण, देसंविवि व शांतिकुंज परिवार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।