उन्होंने कहा कि 18 लाख रुपये मूल्य की 0.45 बोर की यह पिस्तौल प्रतिबंधित श्रेणी की है और इसे रखना या बेचना दोनों ही भारतीय शस्त्र अधिनियम 1959 के तहत अपराध है। उन्होंने कहा कि केवल पिस्तौल जब्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे रखने, बेचने और अवैध रूप से लाइसेंस जारी करने वालों के विरुद्ध भी समान कानूनी कार्रवाई करना जरूरी है।
विधायक राय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इंडियन आर्म्स एक्ट की धारा 25 के अनुसार प्रतिबंधित आग्नेयास्त्र रखने या बेचने पर न्यूनतम पांच वर्ष की सजा का प्रावधान है, जो 10 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। प्रस्तावित संशोधन के बाद यह सजा सात वर्ष से 14 वर्ष तक भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस स्पष्ट प्रावधान के बावजूद अब तक जिला प्रशासन की कार्रवाई अधूरी प्रतीत होती है।
राय ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर 28 अप्रैल 2023 को ही उपायुक्त को पत्र भेजा था और पूर्व में राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्रालय के अधिकारियों को भी सूचित किया था कि तत्कालीन मंत्री की ओर से प्रतिबंधित पिस्तौल रखा जाना कानून का उल्लंघन है। बावजूद इसके उस समय न तो पिस्तौल जब्त की गई और न ही उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई, बल्कि उसे अवैध रूप से लाइसेंस जारी कर दिया गया।