धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक शुक्ल एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक जगतपिता भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर सरोवर में सृष्टि यज्ञ संपन्न किया था। इस अवधि में स्वयं ब्रह्माजी सहित सभी देवी-देवता सरोवर में निवास करते हैं, और यहां स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस स्नान को पंचतीर्थ या भीष्म पंच स्नान कहा जाता है।
52 घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष अच्छी वर्षा के कारण सरोवर में जलस्तर सामान्य से अधिक है, जिसके चलते प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए हैं। एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें घाटों पर तैनात हैं, जबकि पुलिस बल भी हर समय निगरानी रखे हुए है। महिलाओं की गोपनीयता की रक्षा हेतु घाटों पर फोटोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
इधर पुष्कर गुरुद्वारा से रविवार सुबह आध्यात्मिक यात्रा का भी शुभारंभ किया गया। मंत्री सुरेश सिंह रावत एवं साधु-संतों की उपस्थिति में यात्रा नए रंगजी मंदिर से प्रारंभ होकर मेल स्टेडियम तक पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और ढोल-नगाड़ों से यात्रियों का स्वागत किया। इस भव्य यात्रा में शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने सजे-धजे रथों और झांकियों के माध्यम से अपनी आस्था का प्रदर्शन किया। लोक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और भजन-कीर्तन से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
मंत्री सुरेश सिंह रावत ने इस अवसर पर कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी पुष्कर मेले की शुरुआत भव्यता के साथ हुई है। राज्य सरकार ने मेले की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में सभी सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है।