अभियोजन ने बुधवार को बताया कि जिले के भालूमाड़ा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अमनदीप सिंह छाबड़ा के शासकीय आवास पर 25 अक्टूबर की रात्रि तीन आरोपियों ने पत्थर मारने एवं जान से मारने की धमकी दी थी। जिसकी रिर्पोट थाना भालूमाड़ा में अपराध भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धारा 224, 296, 324, 331(6),333 एवं 351(3) के तहत पंजीबद्ध किया गया था।
न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने आदेश में कहा कि यह कृत्य गंभीर हैं “जमानत आवेदन निरस्त होने के न्यायिक आदेश से व्यथित होकर विधिक प्रक्रिया का पालन न करते हुए, न्यायाधीश व उसके परिवार को भयाक्रांत कर पथराव करते हुए लोक संपत्ति को रिष्टि कारित करने एवं न्यायिकत कार्य करने वाले न्यायाधीश को जान से मारने की धमकी दिये जाने का कृत्य अत्यन्त गंभीर प्रकृति का परिलक्षित है, जो समाज को उचित संदेश भी प्रेषित नहीं करता। आरोपियों का यह कृत्य न्याय पालिका के प्रति आदर के संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन होकर गंभीर आपराधिक कृत्य को इंगित करता है।
पुलिस द्वारा दिये गए दस्तावेजों के अनुसार, आरोपी प्रियांशु सिंह पर वर्तमान मामले को मिलाकर कुल 07 आपराधिक प्रकरणों का रिकॉर्ड है। इस मामले में भी पुलिस ने आरोपियों के विरूद्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (CCTV फुटेज और मोबाइल फोन कॉल डिटैल) संग्रहित किया हैं। साथ ही आरोपी ने अपने बयान में अपराध की स्वीकारोक्ति कर घटना में प्रयुक्त दो पहिया वाहन को भी बरामद कराया है। न्यायालय ने यह देखते हुए तीनों आरोपियों को जमानत रद्द करते हुए कहा कि जमानत आवेदन के निरस्त होने पर समरूप प्रकृति के अपराध की पुनरावृत्ति की संभावना है, और जांच अभी लम्बित है।