चुनाव नहीं बल्कि भीषण आपदा में बेघर हुए लोगों को बसाना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले सरकार की प्राथमिकता उजड़े हुए लोगों के घरों को बसाने तथा तहस नहस हुए ढांचे को दुरुस्त करने है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लागू डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत अब चुनाव आयोग भी आ जाता है। ऐसे में चुनावों को लेकर वह भी सरकार पर कोई दबाव नही बना सकता। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी शीत सत्र के दूसरे दिन सदन में विपक्ष द्वारा पंचायती राज चुनावों को लेकर काम रोको प्रस्ताव के तहत हुई चर्चा के जवाब में दी। इस मुद्दे पर सदन में दो दिन चर्चा हुई जिसमें दोनों पक्षों की ओर से सदस्यों ने हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 128 बहुत साफ कहती है अगर असाधारण परिस्थितियों में पुनर्गठन नहीं हो पाए, तो व्यवस्था की जा सकती है। अधिकतम 6 महीने तक की वैकल्पिक व्यवस्था सम्भव है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी किशन सिंह केस में कहा गया है कि जब हालात असाधारण हों, दंगे, कानून-व्यवस्था का विघटन या भीषण प्राकृतिक आपदा- तो चुनाव स्थगित करना न्यायोचित है।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 72 के तहत भारत के किसी भी अन्य विधि में विद्यमान किसी असंगत प्रावधान के रहते हुए भी प्रभावी होंगे। यानी, यदि किसी अन्य कानून और आपदा प्रबंधन अधिनियम में टकराव हो, तो आपदा प्रबंधन अधिनियम ही सर्वोपरि होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू है, कोई भी अन्य कानूनी प्रक्रिया-उसमें पंचायत चुनाव भी शामिल हैं- इससे ऊपर नहीं जा सकती। इस एक्ट की प्राथमिकता और उसका उद्देश्य सबसे पहले पूरा होगा। यही वजह है कि आज प्रदेश में यह कानून प्रभावी रहते हुए हम पंचायत चुनाव करवाने के लिए बाध्य नहीं हो सकते। यह न कानूनी रूप से उचित है न व्यावहारिक रूप से संभव। उन्होंने कहा कि आज हिमाचल उन्हीं असाधारण प्राकृतिक परिस्थितियों से गुजर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत चुनाव केवल वोटिंग नहीं यह एक विशाल सुरक्षा और प्रशासनिक ऑपरेशन है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव 3 चरणों में हुए। जिसमें 20 हजार 55 पोलिंग बूथ बनाए गए। लगभग 10 हजार पुलिस कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में लगे। इसके अतिरिक्त लगभग 5 हजार गृह रक्षक भी तैनात किए गए थे। ये आंकड़े बताते हैं कि पंचायत चुनाव एक बहुत बड़ा सुरक्षा प्रबंधन है। वहीं वर्तमान में हिमाचल के लगभग एक हजार पुलिस कर्मी आज भी आपदा प्रबंधन और कानून-व्यवस्था ड्यूटी में लगातार तैनात हैं। प्रतिदिन 7 हजार से अधिक जवान कानून-व्यवस्था, अन्वेषण, वीआईपी ड्यूटी, कैदियों/अभियुक्तों को न्यायालय ले जाना और अन्य अनिवार्य फील्ड दायित्वों में लगे हुए हैं। इन्हीं कारणों से वर्तमान परिस्थितियों में पंचायत चुनाव के लिए पुलिस का आवश्यक स्तर का डिप्लॉयमेंट सम्भव ही नहीं है। जो जवान आज मलबा हटाने से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी आपदा राहत कार्यों में लगातार जुटे हैं, उन्हें स्थिति ठीक होने से पहले वापस नहीं खींचा जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के कारण गांव-गांव की टूटी सड़कों से मतदान केन्द्रों तक सुरक्षित पंहुचाना अभी भी कठिन है। माताएं-बहनें, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, दिव्यांगजन और दूरदराज़ पहाड़ी क्षेत्रों के लोगलिए अभी तक टूटी सड़कों पर चलकर मतदान केन्द्र तक पंहुचना असंभव-सा है। जब सड़कें ही नहीं हैं, रास्ते ही नहीं खुले, पुल बह चुके हैं, तब चुनाव सामग्री, मतदान दल और मतदाताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों एकमत हैं और उनमें कोई टकराव नहीं है। चूंकि विपक्ष के नेता खुद ही आपस में वर्चस्व की लड़ाई में लगे हैं और उनके पास कोई मुद्दा उठाने के लिए नहीं है सिर्फ़ इसलिए इस पंचायत चुनाव को सरकार और राज्य चुनाव आयोग के मध्य टकराव की तरह पेश करने की कोशिश कर रहा है। परंतु सच्चाई यह है कि सरकार और आयोग संविधानिक दायित्वों के तहत पूरी समन्वय में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष पंचायतों तथा विकास खण्डों के पुनर्गठन को मुद्दा बना रही है। आपदा की स्थिति के कारण पंचायतों और विकास खण्डों के पुर्नगठन के प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जा सका जबकि ऐसी प्रस्तावनाओं पर जन अकाक्षाओं का जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनावों के लिए अधिकतम 6 महीने तक की वैकल्पिक व्यवस्था सम्भव है। पंचायत चुनाव केवल वोटिंग नहीं यह एक विशाल सुरक्षा और प्रशासनिक ऑपरेशन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वार्डों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का परिसीमन ग्राम पंचायतों/विकास खण्डों के पुर्नगठन के प्रशासनिक निर्णयों का परिणाम होता है जिसके लिए हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 124 के तहत सम्बन्धित जिलों के उपायुक्त अधिकृत है। पंचायतों के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन पंचायतों के पुर्नगठन के अनुसार किया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग से सरकार ने पुरानी 3615 ग्राम पंचायतों में से संहिता की संहिता संख्या 12.1 को लागू किया गया है, को वापिस लेने का आग्रह किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पुरानी 3615 ग्राम पंचायतों में से 42 पंचायतें शहरी निकायों में शामिल हो गईं। अब प्रदेश में 3577 ग्राम पंचायतें रहेंगी। 3577 में से 3548 पंचायतों की सूची तैयार है जबकि बाकी 29 की तैयारी अंतिम चरण में है।

विपक्ष को चुनाव की नही राजनीति की चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को चुनाव की नहीं, राजनीति की चिंता है। हमें जनता की सुरक्षा की चिंता है। न्यायालय का सम्मान, जनता की जान-माल की सुरक्षा गारंटी और हर मतदाता के सुगम एवं सुरक्षित मताधिकार की। हम हिमाचल की जनता को किसी भी तरह का जोखिम उठाकर चुनाव में नहीं धकेल सकते। इसलिए जैसे ही सड़कें बहाल होंगी, मार्ग सुरक्षित होंगे, आपदा प्रबंधन की स्थिति सामान्य होगी, पुलिस बल का पर्याप्त पुनः प्रबंधन संभव होगा, सरकार राज्य निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर समयबद्ध, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सुरक्षित पंचायत चुनाव करवाएगी।

विपक्ष को दिख रही महज राजनीति

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को राजनीति के लिए भले अवसर दिखाई देते हों पर हमें हिमाचल की जनता के दर्द, कठिनाई और जीवन-सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी है। चुनाव समय पर होंगे लेकिन जनता की सुरक्षा और सम्मान के साथ, किसी भी कीमत पर समझौता नही। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार संकट की इस घड़ी में राजनीति से ऊपर उठकर, कानून के दायरे में रहकर और मानवीय संवेदनशीलता को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय ले रही है।