फरीदाबाद में डॉ. मुजम्मिल ने फल व्यापार करने को खोरी जमालपुर में लिया था कमरा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा की गई पूछताछ में सामने आया कि मुजम्मिल इस मकान पर कई बार डॉ. शाहीन सईद के साथ आया था। वहीं एजेंसी ने यह भी पता लगाया है कि करीब 2540 किलो विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल हुए अमोनियम नाइट्रेट को पहले अल-फलाह यूनिवर्सिटी से सटे खेतों में बने एक कमरे में लगभग 12 दिन तक छिपाकर रखा गया था। बाद में चोरी या पकड़े जाने के डर से इस सामग्री को गांव फतेहपुर तगा में इमाम इश्तियाक के पुराने घर में शिफ्ट कर दिया गया।

जांच में पता चला कि मुजम्मिल ने अप्रैल से जुलाई 2025 तक खोरी जमालपुर स्थित तीन बेडरूम का मकान 8 हजार रुपये मासिक किराए पर लिया था। यह मकान जुम्मा की प्लास्टिक फैक्ट्री के ऊपर बना हुआ है। जुम्मा के अनुसार डॉ. मुजम्मिल ने उनसे कहा था कि वह कश्मीरी फलों का बड़ा सप्लाई कारोबर करना चाहता है और इसके लिए उसे बड़ी जगह की जरूरत है। लगभग ढाई महीने तक रहने के बाद उसने कमरा यह कहते हुए खाली कर दिया कि यहां गर्मी बहुत अधिक है।

पूर्व सरपंच जुम्मा ने के एन आई ए को बताया कि उनकी मुलाकात मुजम्मिल से अल-फलाह अस्पताल में हुई थी, जहां वे अपने कैंसर पीड़ित भतीजे का इलाज करवा रहे थे। इलाज के दौरान उसकी पहचान डॉ. उमर नबी और मुजम्मिल दोनों से हो गई थी। बाद में यह पहचान इतनी गहरी हो गई कि मुजम्मिल कई बार उनके ऑफिस भी आता रहा। जब उसने किराए पर मकान लिया, तब वह एक महिला के साथ आया और उसे परिवार का सदस्य बताया। जांच में सामने आया कि वह महिला अल-फलाह यूनिवर्सिटी की डॉ. शाहीन सईद थी, जो अक्सर उसके साथ उसी मकान में आती थी।

करीब तीन महीने बाद जब मुजम्मिल ने मकान खाली किया तो 15 दिन की देरी हो चुकी थी। जुम्मा ने उससे कोई अतिरिक्त किराया नहीं लिया, क्योंकि वह डॉक्टर था। कमरे में रखा गद्दा, कूलर और चादर तक वह अपने साथ ले गया। एन आई ए की टीम ने कई घंटों तक जुम्मा से पूछताछ की और मकान का मुआयना किया।