14 जून 2023 को हुए इस घटना में मृतक महेश कुमार अपने घर लौट रहा था। रास्ते में जबरन घसीटते हुए अपने घर के अंदर ले जाकर सुनियोजित तरीके से किढावना से बुलाये गए अन्य आरोपित ऋषभ और रहिस के साथ मिलकर महिपाल, सुनीता ओर उसके पुत्र ने मारपीट की जिससे उसके शरीर पर 16 चोटे आयी। उसके बाद सुनियोजित ढंग से गंभीर मारपीट की गई। आरोप है कि महिपाल और सुनीता ने पहले महेश को पकड़ा फिर अपने सहयोगियों रहीश और ऋषभ को किढ़वाना से बुलाकर उसके साथ मिलकर हमला किया। पीड़ित को आई गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। इस मामले में चार आरोपित थे जबकि एक नाबालिग का प्रकरण किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है।
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच पूरी कर चालान कोर्ट में पेश किया। इसके बाद लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना की परिस्थितियों के आधार पर आरोपितों की भूमिका स्पष्ट की। 24 नवंबर 2025 को कोर्ट ने सुनिता, महिपाल, रहीश और ऋषभ को दोषसिद्ध घोषित कर गुरुवार को सजा सुनाई। कोर्ट ने अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148 और 302-149 के तहत दोषी पाया। साथ ही अभियुक्त सुनीता और महिपाल को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(अं) में भी दोषसिद्ध घोषित किया गया। फैसले में कहा गया कि यह हत्या अत्यंत जघन्य प्रकृति की है और किसी भी प्रकार की नरमी बरतना न्याय के हित में नहीं होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराध समाज की शांति और कानून व्यवस्था पर सीधा प्रहार होते हैं। ऐसे मामलों में कठोर सजा ही समाज को संदेश देती है कि अपराध स्वीकार्य नहीं है। न्यायाधीश ने आदेश में लिखा कि यदि समाज को अच्छे लोगों के रहने लायक बनाना है तो अपराधियों को कठोर दंड देकर समाज को अपराधमुक्त करना होगा। कोर्ट ने चारों आरोपितों को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और प्रत्येक को 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 147 और 148 में एक-एक वर्ष का कठोर कारावास तथा 5-5 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सुनीता और महिपाल को एससी-एसटी एक्ट के तहत तीन साल के साधारण कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी दी गई है। अदालत ने आदेश दिया कि सभी मूल सजाएं साथ-साथ चलेंगी और न्यायिक व पुलिस अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को उनकी सजा में समायोजित किया जाएगा।