मेला प्रबंधक कश्मीर सिंह यादव ने बताया कि “अगहन पूर्णिमा के दिन विधिवत हवन-पूजन के साथ मेले का शुभारंभ किया जाएगा। इस वर्ष मेला 4 दिसंबर से 4 जनवरी तक चलेगा। तैयारियों को लगभग अंतिम रूप दे दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।” उन्होंने बताया कि मेले में प्रतिवर्ष इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, जालौन और आसपास के जनपदों से हजारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
मेले में जलेबी, खजला, नमकीन और प्रसाद की बिक्री सबसे अधिक रहती है। इसके अलावा बच्चों के लिए झूले, छोटे-छोटे खिलौनों की दुकानें, कपड़े, लोहे-बर्तनों समेत गृहस्थी के सामान की बड़ी दुकानें भी लगती हैं। पशुओं—विशेषकर बैल, बछड़े और बकरियों—की खरीद-फरोख्त भी मेले की खास पहचान है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला यह पारंपरिक मेला पूरे महीने चहल-पहल से भरा रहता है।
इसी प्रकार, रघुनाथपुर स्थित श्री जाहरवीर ठाकुर जी महाराज मंदिर में भी अगहन पूर्णिमा से तीन दिवसीय मेला शुरू होगा। यहाँ भी दूर-दराज के गाँवों और जनपदों से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। दोनों मेलों के चलते पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक गतिविधियों का माहौल बन गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि दोवा माफी का दुर्वासा ऋषि मेला वर्षों से आस्था और परंपरा का केंद्र रहा है। इस बार भी श्रद्धालुओं को मेले से बड़ी उम्मीदें हैं, और लोगों ने उत्साह के साथ तैयारियाँ प्रारंभ कर दी हैं।