अपील में महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद और अधिवक्ता एमएफ बेग ने बताया कि पहले साल 2024 में भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था और आयोग की वेबसाइट पर 26 मार्च को सिलेबस अपलोड किया गया था। वहीं बाद में इस भर्ती को रद्द कर नियमों में बदलाव कर गत 18 सितंबर को वापस भर्ती निकाली गई थी। भर्ती को लेकर तय किया गया कि पूर्व के सिलेबस को ही इसमें लागू किया जाएगा। ऐसे में उस सिलेबस को ही आवेदन की अंतिम तिथि से पूर्व 8 अक्टूबर को अपलोड किया गया। अपील में कहा गया भर्ती विज्ञापन में ही प्रावधान किया गया था कि अभ्यर्थी नवीनतम जानकारी के लिए आयोग की वेबसाइट को देखे और उन्हें अलग से कोई सूचना नहीं भेजी जाएगी। इसके अलावा आईटी विभाग के समक्ष अधिकारी की रिपोर्ट और संबंधित नोटशीट से साबित है कि सिलेबस वेबसाइट पर अपलोड है। अपील में कहा गया कि एकलपीठ में अभ्यर्थियों ने ही अपनी याचिका में माना है कि सिलेबस बहुत विस्तृत है। जिससे साबित है कि उन्हें इसकी विषय वस्तु का ज्ञान है। अपील में एकलपीठ के रोक के आदेश पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया कि एकलपीठ ने आयोग की नोट शीट को बाद में एडिट करने और कोचिंग संचालकों की मिलीभगत की बात कही है, जबकि याचिका में इस संबंध में कोई बात नहीं कही गई थी। इसके अलावा भर्ती को लेकर सारी तैयारी हो चुकी है। सातों संभाग में परीक्षा केन्द्र सहित परिवीक्षक तक तय हो चुके हैं। दूसरी ओर एकलपीठ के अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया कि आयोग हर भर्ती में प्रेस नोट के साथ सिलेबस जारी करता है। अभ्यर्थियों की ओर से आयोग की वेबसाइट खोलकर बताया गया कि अभी भी सिलेबस अपलोड नहीं है, लेकिन इस दौरान महाधिवक्ता ने वेबसाइट पर सिलेबस दिखा दिया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया है।