आयोजन की सबसे विशेष और भक्तिमय छवि रही। 600 मीटर लंबी सतरंगी चुनरी का यमुना तट पर सम्मान। श्रद्धालुओं के सहयोग से तैयार की गई इस चुनरी को तीन नावों की सहायता से एक तट से दूसरे तट तक ले जाया गया। चुनरी ने यमुना के पवित्र जल को स्पर्श करते हुए मानो भक्तों की आस्था को साकार रूप दिया। इस अनूठे दृश्य को निहारने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु घाटों पर मौजूद रहे और भक्ति गीतों के बीच हर-हर महादेव तथा जय मां कालिंदी के जयकारे गूंजते रहे। इस दौरान सिंहमहेश्वर मंदिर आश्रम के महंत एवं पीठाधीश्वर त्रिभुवन दास महाराज, पंचायती अखाड़ा के पीठाधीश्वर अद्वैतानंद महाराज, जूना अखाड़ा के अन्य संत एवं महंत उपस्थित रहे।
अखाड़े की जमात द्वारा रामधुन व शिव स्तुति के मधुर स्वर पूरे क्षेत्र में गूंजते रहे। इसके उपरांत दीपदान का आयोजन हुआ, जिसमें यमुना मां की आरती के साथ सैकड़ों दीप एक साथ प्रज्वलित किए गए। दीपों की रोशनी से पूरा तट दिव्य आभा से आलोकित हो उठा। आरती के बाद संकीर्तन शुरू हुआ और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। महंत त्रिभुवन दास महाराज ने जनपदवासियों से अपील की कि आगामी विशेष पूजा और अनुष्ठानों में अधिक संख्या में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करें। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में महादेव रूपी भस्म के गोले की विशेष पूजा कराई जाएगी, जो नित्य शिव श्रृंगार करने वाले भक्तों के सहयोग से संपन्न होगी।