पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में मांगों को लेकर वन श्रमिकों ने किया प्रदर्शन

पलामू, 30 दिसंबर । टाइगर एस्टीमेशन के बीच पलामू टाइगर प्रोजेक्ट मुख्यालय डालटेनगंज में 10 सूत्री मांगों को लेकर झारखंड वन श्रमिक यूनियन के तत्वावधान में सैकडाें वनकर्मियों ने मंगलवार को धरना प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का नेतृत्व यूनियन के महामंत्री मोमिन अंसारी ने किया।

मौके पर महामंत्री मोमिन अंसारी ने कहा कि वन विभाग के अधिकारी श्रमिकों के हित की अनदेखा करते हैं और मजदूरों पर दमनात्मक कार्रवाई की जाती है। उन्‍होंने कहा कि विभाग मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं देता है लेकिन 24 घंटे काम ले रहा है। यह विभाग का अमानवीय कृत है। मजदूर के भुगतान का पैसा बंदरबांट किया जा रहा है। कुशल, अकुशल, अर्ध कुशल का मजदूरी भुगतान मनमाने तरीके से किया जा रहे हैं। ट्रैकर पर फर्जी केस कर उसे परेशान किया जा रहा है। महामंत्री ने कहा कि व्याघ्र परियोजना प्रबंधन अपने समझौता के प्रतिकूल कार्य कर रहा है। यही कारण है कि उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अब हम भी आर पार की लड़ाई लड़ेंगे।

यूनियन के क्षेत्रीय मंत्री श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि महुआडांड़ भेड़िया अभ्‍यारण्‍य में कार्यरत ट्रैक्टरों को अप्रैल से दिसंबर 2025 तक 9 महीने से मजदूरी नहीं दी गई है जिसके कारण वन श्रमिक भुखमरी के कगार पर हैं।

वहीं मौके पर अन्य वक्ताओं ने कहा कि पलामू ब्याघ्र संरक्षण फाउंडेशन में करोड़ों रुपए जमा हैं, लेकिन श्रमिक अपना दैनिक पारिश्रमिक के लिए तरस रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि यहां हर वर्ष वन श्रमिक समुचित इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। इसलिए अब हम विभाग का छल प्रपंच से उब चुके हैं।

यूनियन अध्यक्ष सिद्धनाथ झा ने कहा कि 2 वर्ष में दो बार क्षेत्र निदेशक स्तर पर समझौता कर यूनियन को आश्वासन दिया गया, लेकिन समझौता के विपरीत वन अधिकारियों के कार्यकलाप से मजदूरों में असंतोष है। मजदूरों का वाजिब हक और मजदूरी भुगतान में हेराफेरी की जाती है। यह विभागीय पदाधिकारी के न्यायशीलता पर प्रश्न चिन्ह है। अधिकारी यूनियन के बीच विश्वास कायम करना चाहिए नहीं तो पलामू ब्याघ्र परियोजना के क्रियाकलाप और हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।