नारायणपुर, 17 जनवरी । जिले के महिमागवाड़ी पंचायत के नयापारा में मां लक्ष्मी जगार का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ आज शनिवार काे संपन्न हुआ। 9 दिवसीय लक्ष्मी जगार का आयोजन किया गया, आयोजन के दौरान धनकुल गीत जारी रहा जाे लक्ष्मी जगार की पहचान है। नयापारा में आयोजित लक्ष्मी जगार में श्रद्धा, भक्ति और लोकगीतों का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने बस्तर की लोक परंपराओं को जीवंत कर दिया।
मां लक्ष्मी जगार का आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, यह बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति को सहेजने का माध्यम भी है।लक्ष्मी जगार में बस्तर की पहचान बन चुके धनकुल गीत हल्बी भाषा में गाए जाते हैं। इन गीतों में धनुष से उत्पन्न विशेष ध्वनि के साथ मिट्टी की हंडी और पारंपरिक वाद्यों के जरिए देवी लक्ष्मी की आराधना की जाती है। इस परंपरा को निभाने वाले गायकों को हल्बी भाषा में ‘गुरुमाय’ कहा जाता है, जिसका अर्थ गुरु माता होता है। ग्रामीणों ने बताया कि बस्तर में कुल चार प्रकार के जगार होते हैं, जिनमें लक्ष्मी जगार का विशेष महत्व है। इस जगार की खास बात यह है कि इसमें पुरुष और महिलाएं दोनों समान रूप से भाग लेते हैं, और पूरी रात देवी की आराधना गीतों के माध्यम से की जाती है।