प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह बने गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान के निदेशक

प्रयागराज, 23 जनवरी । इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के नियंत्रणाधीन गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, झूंसी का निदेशक नियुक्त किया गया है।

प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी और आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में बतौर प्रोफेसर कार्यरत थे और उन्हाेंने बसंत पंचमी के पावन पर्व पर शुक्रवार को संस्थान के निदेशक का पदभार ग्रहण किया। संस्थान की कार्यकारी निदेशक डा. अर्चना सिंह ने उन्हें कार्यभार सौंपा।

इस अवसर पर प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि गोविंद बल्लभ सामाजिक शोध संस्थान भारत का प्रतिष्ठित शोध संस्थान है। सामाजिक शोध की गतिविधियों को बढ़ाना और संस्थान को वैश्विक बनाने की दिशा में प्रयास होंगे। विश्व भर में फैले संस्थान के पुरा छात्रों से समन्वय स्थापित कर संस्थान के हित में कार्य करना भी हमारी प्राथमिकता रहेगी। केंद्र और राज्य सरकारों की पॉलिसी निर्धारण में शोध के माध्यम से सहयोग किया जाएगा ताकि सम्पूर्ण सामाजिक विकास में संस्थान की भूमिका बढ़े। भारतीय ज्ञान परम्परा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार शोध और शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जाएगा। सामाजिक जीवन की वर्तमान समस्याओं को देखते हुए साइबर सिक्योरिटी, ई-गवर्नेंस और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में नवाचारों पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि हम जटिल सामाजिक चुनौतियों का विश्लेषण कर सकें और सामूहिक कल्याण के लिए नवीन समाधान प्रस्तुत कर सकें।

इस अवसर पर गोविंद बल्लभ पंत संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी केशव किशोर उपाध्याय, सहायक आचार्य डा. सुभाष कुमार, अनुभाग अधिकारी विमल किशोर प्रसाद सहित डा. सुनीता सिंह, डा. विनम्र सेन सिंह, डा. सुजीत सिंह और डा. अरुण वर्मा भी मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि, भाषा विज्ञान के साथ सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में कुशल प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह भाषा विज्ञान के साथ ही सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में भी अनुसंधान करते रहे हैं। भाषा प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उनकी पुस्तक ‘‘कम्प्यूटर की मेधा’’ बहुचर्चित और प्रसंसित रही है। प्रो. सिंह मीडिया और पत्रकारिता विषय में भी विशेषज्ञ हैं। वे पूर्व में भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय आदि में सलाहकार के रूप में और उत्तर प्रदेश सरकार हिंदी संस्थान और भाषा संस्थान में सदस्य के रूप में कार्य करते रहे हैं। वे देश के 20 से अधिक विश्वविद्यालयों की समितियों के सदस्य भी रहे हैं। प्रो. सिंह पिछले दस वर्षों से मानविकी और सामाजिक शोध की अग्रणी शोध पत्रिका और शोध पोर्टल का संपादन कर रहे हैं। इसके साथ ही, भारत सरकार के संस्कृति विभाग के लिए शोध किया है। प्रो. सिंह ने 10 से अधिक किताबों को लेखन किया है, इसके साथ ही विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 35 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं।