नई दिल्ली, 24 जनवरी । केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने शनिवार को कहा कि भारत आज न केवल पत्थरों और अवशेषों को सहेज रहा है बल्कि एशिया की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित करने के लिए भी संकल्पबद्ध है।
गजेन्द्र शेखावत ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) द्वारा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित ‘दूसरा वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन’ के उद्घाटन पर कही। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) द्वारा इस सम्मेलन का विषय ‘सामूहिक बुद्धिमत्ता: एकता और सह-अस्तित्व की ओर’ है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में एकता, शांति और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देना है।
शेखावत ने कहा, “पिपरहवा अवशेषों की वापसी और प्राचीन ग्रंथों का आधुनिक संरक्षण इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी विरासत को लेकर एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। यह प्रयास न केवल भारत की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करेगा बल्कि पूरे एशिया को बुद्ध के शांति और ज्ञान के सूत्र में पिरोने का काम भी करेगा।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लिए ये अवशेष केवल संग्रहालय की वस्तुएं या कलाकृतियां नहीं हैं बल्कि ये हमारी महान सभ्यता के जीवंत प्रतीक और उस शांति एवं करुणा के वाहक हैं, जिसका संदेश भगवान बुद्ध ने पूरी दुनिया को दिया था।
मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा की गई कई नई पहलों में ‘ज्ञान भारत’ राष्ट्रीय मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटलीकरण करना, भाषाएं पाली, प्राकृत, संस्कृत और तिब्बती जैसी भाषाओं में उपलब्ध बौद्ध ग्रंथों को संरक्षित करना, ताड़ के पत्तों, भोजपत्रों और प्राचीन हस्तनिर्मित कागजों पर लिखे गए दुर्लभ ज्ञान को तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रखना और तकनीक के माध्यम से धम्म का संरक्षण करना शामिल है ताकि आने वाली पीढ़ियां बुद्ध के ज्ञान से वंचित न रहें।
संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बुद्ध धर्म न केवल व्यक्तिगत शांति के लिए है बल्कि यह वैश्विक शांति के लिए भी है। बौद्ध धर्म एक सार्वभौमिक अवधारणा है। इसलिए कोई भी सार्वभौमिक शांति और सद्भाव की अवधारणा में विश्वास करता है, तो वह बुद्ध धर्म का अनुयायी है।
इस मौके पर मंत्रियों के अलावा, विश्वभर से लगभग 200 अंतरराष्ट्रीय संगठन-प्रमुख बौद्ध संघों के नेता और प्रतिष्ठित भिक्षुओं सहित अन्य गणमान्य जन मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि 03 जनवरी को नई दिल्ली स्थित राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में “प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष” शीर्षक नामक प्रदर्शनी की लगाई गई है। इसमें उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के गांव पिपरावा से प्राप्त भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों, अस्थि-कलशों और रत्न अवशेषों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान तक की 80 से अधिक मूर्तियां, पांडुलिपियां, थांगका और अनुष्ठानिक वस्तुएं शामिल हैं। यह प्रदर्शनी भारत की आध्यात्मिक आत्मा और वैश्विक विरासत की रक्षा के संकल्प को दर्शाती है। इन अवशेषों को 127 वर्षों के बाद पिछले साल जुलाई में मंत्रालय की ओर से स्वदेश वापस लाया गया है।