सर्व देवता सेवा समिति ने इस स्थान को लेकर सरकार और उपायुक्त मंडी से अाग्रह किया कि बार-बार देवताओं का स्थान न बदले इसलिए कुल्लू की तर्ज़ पर देवताओं के स्थान जहां चिन्हित किए गए हैं उनको राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
इसके अलावा शिवरात्रि के दौरान देवताओं की माधोराय की जलेब जैसे पहले शांतिप्रिय ढंग से निकालीजाए। इसके लिए कारदारों से अनुरोध किया गया कि अपने अपने देवताओं के आगे जो भी श्रद्धालु या देवलु चले होते हैं देव परंपरा को देखते हुए जलेब निकालें। अगर कोई ऐसा कोई तत्व जलेब का माहौल खराब कर रहा हो तो तुरंत प्रशासन को अवगत करवाए I जलेब का एक प्रोटोकॉल होता है जिसमें अनुशासन रखना बहुत जरूरी है । कारदारों से अनुरोध किया गया कि जलेब कि पहले नंगी तलवारों की नाटी नहीं की जाती थी। कुछ वर्षों से यह प्रचलन शुरू हुआ है अगर भीड़ में किसी को तलवारों की चोट लग जाए तो अच्छा नहीं होगा। इस वर्ष माधोराय की जलेब पड्डल में जहां देवी देवता क्रम से बैठे हुए होते हैं उनके आगे से होते हुए चानणी तक जाएगी और चानणी मैं माधोराय जी को विराजमान करेंगे। जब जलेब देवताओं के समक्ष आएगी तो देवताओं के कारदार अपने-अपने देवता की छड़ी और शेष फूल लेकर माधोराय का स्वागत करेंगे । जिन देवी देवताओं को स्वागत के लिए राज माधोराय की छड़ियां जाती है उन देवी देवताओं के कारदारों से अनुरोध किया गया कि प्रशासन द्वारा जो निमंत्रण पत्र दिया जा रहा है। उसमें देवी देवताओं के मंडी पहुंचने का समय निश्चित है और जहां जहां माधोराय की छड़ियां स्वागत करने के लिए जाती है वो निर्धारित समय पर पहुंचे और जो माधोराय के साथ मिलने का समय के क्रम में पहुंचे।
साधारण सभा में कारदारों ने मुद्दा उठाया कि बड़ादेव कमरू नाग जो मंडी में प्रमुख देवता है जिन्हें बारिश का देवता माना जाता है। बीते कुछ एक वर्षों से जो गुर बन रहे हैं उनका परता नहीं लग रहा है। जबकि परंपरा के अनुसार जब देवता को धूप दिया जाता था तो देवता अपनी मर्जी से भोले भाले आदमी के धूप देने पर बारिश देता था। इस समय सभी गुरों का परता असफल रहा l