जयपुर, 03 फरवरी । राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान उस समय हंगामा हो गया, जब भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी की राहुल गांधी को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। टिप्पणी को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने बहस के दौरान राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे बिना छपी किताब को लेकर बेवजह आरोप लगा रहे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जो व्यक्ति सदन का सदस्य नहीं है, उसका उल्लेख सदन में नहीं किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। हंगामा बढ़ने पर सभापति ने शाम 4 बजकर 24 मिनट पर सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही पुनः शुरू होने के बाद भी हंगामा जारी रहा, जिसके चलते सदन को दोबारा स्थगित करना पड़ा
सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। डोटासरा ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षकों की ड्यूटी गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाई जा रही है, जिससे स्कूलों में नामांकन घटा है।उन्होंने आरोप लगाया कि बीच सत्र तबादले किए गए और शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा। इस पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पलटवार करते हुए डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाए। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति जताई, जिसके बाद स्पीकर ने आरोपों को कार्यवाही से हटाने का आश्वासन दिया।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि वे शिक्षा मंत्री के आरोपों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों और मौजूदा सरकार के समय भी ऐसी घटनाएं हुई हैं और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने 12 वर्षों के पेपर लीक मामलों की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे सच्चाई सामने आ जाएगी।
डोटासरा ने स्कूलों की बदहाल स्थिति, शौचालयों की कमी और हाईकोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा नवाचार की बजाय मंत्री सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने ईआरसीपी, पंचायत चुनाव, मनरेगा और यमुना जल समझौते सहित अन्य मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईआरसीपी में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई और यमुना जल समझौते में राजस्थान के हितों से समझौता किया गया है। मनरेगा में केंद्र और राज्य के वित्तीय हिस्से को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।