प्रयागराज, 08 फ़रवरी । श्री अन्न के उत्पादन से न सिर्फ कृषकों की आय में वृद्धि होगी अपितु कृषकों के खान-पान एवं मिट्टी के स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। जिससे हम स्वस्थ रहेंगे, हमारी मृदा स्वस्थ होगी तथा हमारा वातावरण भी स्वस्थ्य होगा। यह बातें रविवार को माघ मेला के गंगा पंडाल में कृषि विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय विराट किसान मेले के चौथे दिन किसानों को सम्बोधित करते हुए प्रयागराज के कुलभाष्कर डिग्री कालेज के कृषि वैज्ञानिक डा. मनीष सिंह ने कही।
उन्होंने कहा कि सतत् कृषि को प्राप्त करने का जीवन्त साधन कम लागत में मिलेट्स की खेती करना है। जिसमें संसाधनों की कम आवश्यकता पड़ती है। मिलेट्स को तकनीकी से जोड़ने पर विश्व बाजार में कृषि की भागीदारी को बढ़ाया जा सकता है। प्रयागराज के बहादुरपुर विकासखण्ड के रमईपुर के फूलपुर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के निदेशक उमेश कुमार पटेल ने बताया कि कृषकों के समूह के सहयोग से आज जनपद प्रयागराज के कई कृषक को अपनी देशी भिंडी का निर्यात दुबई जैसे देशों में कर रहे हैं, जिससे उन्हें स्थानीय बाजार से अधिक मूल्य प्राप्त हो रहा है।
शुआट्स, नैनी के कृषि वैज्ञानिक डा. शैलेन्द्र कुमार ने पशु पोषण विषय पर चर्चा की। कहा, पशुओं का स्वास्थ्य उतना ही आवश्यक है जितना कि उसका उत्पाद खाने वाले मनुष्य का है। एक स्वस्थ्य पशु से ही पोषक तत्व युक्त पदार्थ प्राप्त किया जा सकता है और पोषक पदार्थों के प्रयोग से ही हम स्वस्थ रह सकते हैं और देश स्वस्थ रह सकता है।
कौशाम्बी कृषि विज्ञान केंद्र वैज्ञानिक डा. अमित केसरी ने प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि हमारे खेतों का स्वास्थ्य रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के कारण खराब हो रहा है। जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है अपितु मानव स्वास्थ्य पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ रहा है जिससे सुधार हेतु हमें रासायनिक खादों पर निर्भरता को न केवल कम करने की आवश्यकता है बल्कि इसे पूर्ण तरीके से समाप्त करके प्राकृतिक संसाधनों यथा गोबर की खाद, हरी खाद, जीवामृत, बीजामृत एवं अन्य जैविक खाद एवं कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए जिससे भोज्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
प्रयागराज कृषि विकास केंद्र के वैज्ञानिक डा. मुकेश पी मसीह ने किसान कैसे अधिक उत्पादन करें इसके उपाय बताये। डा. आशीष श्रीवास्तव, कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र कौशाम्बी ने बताया कि पशुपालन को कृषि में अपनाने से कृषकों की आय में वृद्धि होती है, अपशिष्टों को फसलों में कार्बनिक रसायन के तौर पर मिट्टी में उपयोग करने से जीवांशों की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे मृदा उर्वरता में वृद्धि होती है। देशी नस्ल के गौवंश के दूध की गुणवत्ता विदेशी नस्ल की गायों की अपेक्षा अधिक होती है। उप कृषि निदेशक, प्रयागराज द्वारा जनपद में संचालित कृषक उत्पादक संगठनों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बीज उत्पादन एवं अन्य उत्पादों को कृषक उत्पादक संगठनों के माध्यम से बेचकर कृषक बन्धु अपने उत्पादन का सही मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। मेले का उद्देश्य कृषि विभाग एवं अन्य सहयोगी विभागों में संचालित होने वाली समस्त योजनाओं एवं तकनीकी जानकारी को कृषकों के मध्य साझा करना है। अन्त में सभी कृषकाें से निवेदन किया कि सभी कृषक फार्मर रजिस्ट्री अवश्य करायें जिससे उन्हें कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलता रहे।
कृषि विभाग के अन्तर्गत खाद, बीज, कृषि रक्षा रसायन, सोलर पम्प, ड्रोन एवं विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया, डेयरी विभाग, उद्यान विभाग एवं विभिन्न कृषक उत्पादक संगठनों द्वारा 40 से अधिक मेले में स्टाल लगाये गये, जिसका विशिष्ट अतिथियो ने अवलोकन किया । कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) प्रयागराज मण्डल-प्रयागराज, प्रसार निदेशक, शुआट्स, उप कृषि निदेशक, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रयागराज, सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण एवं कल्चर) क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला उमेश कुमार पटेल, निदेशक, फूलपुर फार्मर प्रोड्यूसर कं.लि., एवं डा मुकेश पी. मसीह, डा. टी.डी. मिश्रा, डा. शैलेन्द्र कुमार, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय शुआट्स नैनी, डा. मनीष सिंह, वैज्ञानिक, कुलभाष्कर आश्रम महाविद्यालय एवं डा. अमित कुमार केसरी, वैज्ञानिक-कृषि विज्ञान केन्द्र, कौशाम्बी समेत कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी, तथा जनपद के लगभग 6,50 कृषकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रीती त्रिपाठी ने किया।