नेपाल -भारत के बीच सुरक्षा सहयोग पर विशेषज्ञों ने किया विमर्श

काठमांडू, 11 फरवरी । नेपाल–भारत सुरक्षा सहयोग पर दोनों देशों के थिंक टैंक के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा हुई है। नेपाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एंड एंगेजमेंट के मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में दोनों देशों के प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

भारतीय सेना के सबसे पुराने थिंक टैंक यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के महानिदेशक संजय जसजित सिंह ने कहा, “भारतीय सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा की अग्रिम पंक्ति में नेपाली साहस और वीरता हमेशा से रही है।”

भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा थिंक टैंक नेटस्ट्रैट के संयोजक और पूर्व राजदूत पंकज शरण ने नेपाल के युवाओं के साथ हुई बातचीत से स्वयं को काफी प्रभावित बताया। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत—दोनों देशों के युवाओं को भविष्य के नेपाल–भारत संबंधों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

इंडिया फाउंडेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष आलोक बंसल ने कहा कि भारत सीमा-पार आतंकवाद का प्रमुख शिकार रहा है और इसका नेपाल पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर संगीता थपलिया ने कहा कि भारत–नेपाल संबंध थिंक टैंकों और शैक्षणिक केंद्रों के कार्यों से लाभान्वित हुए हैं और सहयोग को सुदृढ़ करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

काउंसिल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड डिफेंस रिसर्च के सह-संस्थापक डॉ. गौरव सैनी ने कहा कि गहरे व्यापारिक, सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों के कारण भारत–नेपाल सीमा विशिष्ट है, लेकिन सीमा के खुले स्वरूप से उत्पन्न साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान मिलकर करना होगा।

नेपाली सेना के अवकाश प्राप्त ब्रिगेडियर जनरल तथा सामरिक मामलों के विशेषज्ञ बिनोज बस्न्यात ने कहा कि नेपाल में जेन–जी के प्रदर्शन अप्रत्याशित नहीं थे, लेकिन उनका स्वरूप चौंकाने वाला रहा। चुनाव के महत्व को स्वीकार करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल चुनाव ही रणनीतिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं। उन्होंने चुनावोत्तर स्थिति को रणनीतिक समाधान से अधिक एक “रणनीतिक विराम” के रूप में व्याख्यायित किया।