जबलपुर : फ़िल्म घूसखोर पंडत’ टाइटल पर आपराधिक मानहानि का परिवाद दायर

जबलपुर, 14 फ़रवरी । फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के शीर्षक को लेकर निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे और ओटीटी प्लेटफॉर्म (नेटफिलेक्स) के पदाधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मानहानि का परिवाद न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद जेएमएफसी पंकज सविता ने 20 फरवरी को परिवादी के बयान दर्ज करने की तिथि नियत कर दी है। यह परिवाद जबलपुर निवासी फिल्मी पटकथा लेखक, कलाकार एवं ज्योतिषी पं. वैभव पाठक द्वारा दायर किया गया है। उन्होंने फिल्म के शीर्षक को ब्राह्मण समुदाय के प्रति अपमानजनक बताते हुए आरोप लगाया है कि ‘पंडित’ शब्द के अपभ्रंश ‘पंडत’ को ‘घूसखोर’ जैसे शब्द के साथ जोडक़र पूरे समुदाय की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई है।

परिवादी ने यह भी उल्लेख किया है कि वह मध्य प्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के सक्रिय सदस्य हैं और ‘पंडित’ शब्द ऐतिहासिक रूप से सम्मानसूचक रहा है, जो जवाहरलाल नेहरु और अटल बिहारी वाजपेयी जैसी विभूतियों के नाम के साथ जुड़ा रहा है। ऐसे में इस शब्द के साथ ‘घूसखोर’ विशेषण जोडऩा सामूहिक कलंक के समान है।

प्रारंभिक सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी फिल्म के शीर्षक को अपमानजनक माना है और शीर्षक बदलने का निर्देश दिया है, हालांकि, उनका कहना है कि ट्रेलर, समाचार-पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार के कारण प्रतिष्ठा-हानि का अपराध पहले ही घटित हो चुका है। अधिवक्ताओं का कहना था कि शीर्षक बदला जा सकता है लेकिन समाज के मानस पर पड़े प्रभाव और प्रतिष्ठा की क्षति की भरपाई संभव नहीं है। इस मामले में अगली कार्यवाही 20 फरवरी को परिवादी के बयान दर्ज होने के साथ आगे बढ़ेगी।

परिवाद में नीरज पांडे (निर्माता/निर्देशक) के साथ रीयल हॉस्टिंग (चेयरमैन, नेटफ्लिक्स), टेड सरनडोस (को-सीईओ, नेटफ्लिक्स), बेला बाजरिया (चीफ कंटेंट ऑफिसर, नेटफ्लिक्स) और मोनिका शेरगिल (कंटेंट हेड, नेटफ्लिक्स इंडिया) को प्रस्तावित अभियुक्त बनाया गया है। परिवाद में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि इस पर संज्ञान लेकर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के माध्यम से विदेशी अभियुक्तों को समन जारी किए जाएं।