आस्था की डोर से जुड़े हैं महादेवा आने वाले कांवरिए

बाराबंकी, 15 फ़रवरी ।उरई, जालौन और औरैया क्षेत्र से आए कांवरियों की भारी भीड़ इस बार भी देखने को मिल रही है। यहां आए तमाम श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से लगातार भोलेनाथ को कांवर चढ़ाने आ रहे हैं जिससे वे वर्ष भर प्रसन्न रहते हैं।

उमेश चंद का कहना है कि पिछले दस सालों से वे लगातार कांवर लेकर आते हैं। बाबा की कृपा से उनकी मनौती पूरी हुई और बड़े दिनों बाद बेटा हुआ जिसके बाद वे इस बार मनौती की कांवर लेकर आए हैं। राम सकल कहते हैं कि उनके उनके बेटे का विवाह हुआ है उसकी खुशी में कांवर लेकर लाए हैं। रमेश चंद्र ने बताया कि उनका बेटा अंबुज बीमार रहता था।भोले बाबा को मनौती मानी और उनका बेटा ठीक हुआ तो वे बिठूर से कांवर लाए हैं।

महादेवा आए कांवरियों के जत्थे “हर हर महादेव” और “बम बम भोले” के जयघोष के साथ मंदिर पहुंच विधि-विधान से जलाभिषेक कर रहे। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि यहां आना केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आस्था, विश्वास और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ाव है। कई परिवार पीढ़ियों से यह परंपरा निभा रहे हैं और नई पीढ़ी भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। यात्रा के दौरान भक्ति गीतों, ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है। श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा भोलेनाथ के दरबार में आने से मन को शांति मिलती है और जीवन में नई ऊर्जा मिलती है।