जांजगीर-चांपा जिले के प्रमुख शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, महाशिवरात्रि पर आस्था का सैलाब

जांजगीर-चांपा, 15 फरवरी (हि. स.)। महाशिवरात्रि के अवसर पर जिले के प्रसिद्ध शिव मंदिरों — लक्ष्मणेश्वर मंदिर खरौद, लिंगेश्वर महादेव मंदिर नवागढ़ और कलेश्वरनाथ मंदिर पीथमपुर — में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखी गईं। पर्व को लेकर मंदिर समितियों ने व्यापक व्यवस्थाएं की थीं तथा सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

खरौद स्थित लक्ष्मणेश्वर मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है। क्षेत्र को रामायण कालीन दंडकारण्य का हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग में लाखों सूक्ष्म छिद्र हैं और जल स्तर स्थिर रहता है, इसलिए इसे अक्षय कुंड भी कहा जाता है। श्रद्धालु इसे गंगा, यमुना और सरस्वती के समान पवित्र मानते हैं।

लोककथाओं के अनुसार लंका विजय के बाद लक्ष्मण जी ने यहां भगवान शिव की आराधना कर पाप मुक्ति की कामना की थी। महाशिवरात्रि पर यहां ‘लाख चावल’ चढ़ाने की परंपरा भी आस्था का प्रमुख केंद्र रही।

नवागढ़ का लिंगेश्वर महादेव मंदिर स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यता के अनुसार शिवलिंग की ऊंचाई समय के साथ बढ़ रही है और इसकी गहराई का सही अनुमान अब तक नहीं लगाया जा सका है। श्रद्धालु यहां वंश वृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

वहीं हसदेव नदी तट पर स्थित पीथमपुर का कलेश्वरनाथ मंदिर उदर रोगों से मुक्ति की मान्यता के कारण प्रसिद्ध है।

जनश्रुति के अनुसार एक जमींदार को स्वप्न में शिवलिंग का संकेत मिलने के बाद यहां मंदिर की स्थापना हुई थी। इसके बाद से दूर-दूर से लोग स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं।

महाशिवरात्रि के साथ रंग पंचमी पर भी इन मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं। इस अवसर पर भव्य शिव बारात निकाली जाती है, जिसमें पंचमुखी शिव की सवारी चांदी की पालकी में निकलती है। शोभायात्रा में साधु-संतों की भागीदारी रहती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।