झारखंड में वीबी-जी राम-जी नहीं, मनरेगा रहेगा नाम

रांची, 18 मार्च । झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को मनरेगा को उसके पुराने नाम से ही जारी रखने का संकल्प पारित किया गया। यह संकल्प राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सदन में पेश किया।

संकल्प में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘वीबी-जी राम-जी’ अधिनियम की जगह मनरेगा को ही जारी रखने की बात कही गई। साथ ही मनरेगा के तहत 100 दिनों के बजाय 150 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया गया।

सदन में प्रस्तुत प्रस्ताव में कहा गया कि ‘वीबी-जी राम-जी’ अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि इससे रोजगार की कानूनी गारंटी, मानव दिवसों की सुरक्षा, ग्राम सभा की शक्तियों और राज्य के वित्तीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए राज्य के हित में मनरेगा को ही जारी रखना आवश्यक है।

इसके अलावा, 5 जनवरी-2026 को इस विषय पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें उप विकास आयुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हुए थे। समीक्षा के बाद इस अधिनियम को लेकर कई चिंताएं जताई गईं।

संकल्प में यह भी कहा गया कि नए प्रावधानों से काम मांगने पर रोजगार मिलने की कानूनी गारंटी समाप्त हो सकती है, काम के दिनों में कमी आ सकती है, महिलाओं के सशक्तिकरण पर असर पड़ेगा और पलायन बढ़ने की आशंका है। साथ ही इससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ सकता है।——-