जयपुर, 03 अप्रैल । राजस्थान हाईकोर्ट ने धौलपुर जिले की बाल कल्याण समिति की सदस्य को बीते दो साल से भत्ते का भुगतान नहीं करने पर 8 अप्रैल को बाल अधिकारिता आयुक्त एवं संयुक्त सचिव को हाजिर होने के आदेश दिए हैं। अदालत ने आयुक्त से यह स्पष्ट करने को कहा है कि याचिकाकर्ता सदस्य को बीते दो साल का बकाया भत्ते का भुगतान क्यों नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि तब तक विभाग चाहे तो बकाया भुगतान कर सकता है। अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार के वकील भुगतान नहीं करने का कारण बताने में असमर्थ हैं तो यह उचित है कि विभाग के आयुक्त को बुलाकर उनसे इस संबंध में जानकारी ली जाए। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश कविता शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता उमाशंकर पांडे ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता जिला बाल कल्याण समिति में सदस्य के तौर पर अक्टूबर, 2023 में नियुक्त हुई थी। बाल अधिकारिता विभाग की ओर से समिति के सदस्यों को काम के बदले भत्ते का भुगतान किया जाता है। याचिका में कहा गया कि विभाग की ओर से मार्च, 2024 से याचिकाकर्ता को किसी भी तरह की धनराशि भत्ते के तौर पर नहीं दी गई है। जिसके चलते उसे वित्तीय परेशानी भी उठानी पड रही है। याचिका में कहा गया कि इस संबंध में विभाग में कई बार प्रार्थना पत्र पेश किए, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी उसे बकाया भुगतान नहीं हुआ है। वहीं विभाग की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह इस संबंध में जानकारी देने में असमर्थ है। इस पर अदालत ने विभाग के आयुक्त को हाजिर होने के आदेश देते हुए कहा है कि विभाग चाहे तो बकाया भुगतान कर सकता है।